श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय सृष्टि का विस्तार श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! यहाँतक मैंने आपको भगवान् की कालरूप महिमा सुनायी । अब जिस प्रकार ब्रह्माजी ने जगत् की रचना की, यह सुनिये ॥ १ ॥ सबसे पहले उन्होंने अज्ञान… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय मन्वन्तरादि कालविभाग का वर्णन श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! पृथ्वी आदि कार्यवर्ग का जो सूक्ष्मतम अंश है — जिसका और विभाग नहीं हो सकता, तथा जो कार्यरूप को प्राप्त नहीं हुआ है और जिसका अन्य… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय दस प्रकार की सृष्टि का वर्णन विदुरजी ने कहा — मुनिवर ! भगवान् नारायण के अन्तर्धान हो जानेपर सम्पूर्ण लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने अपने देह और मन से कितने प्रकार की सृष्टि उत्पन्न की ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा भगवान् की स्तुति ब्रह्माजी ने कहा — प्रभो ! आज बहुत समय के बाद मैं आपको जान सका हूँ । अहो ! कैसे दुर्भाग्य की बात है कि देहधारी जीव आपके स्वरूप को नहीं… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय ब्रह्माजी की उत्पत्ति श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! आप भगवद्भक्तों में प्रधान लोकपाल यमराज ही हैं; आपके पूरुवंश में जन्म लेने के कारण वह वंश साधुपुरुषों के लिये भी सेव्य हो गया है । धन्य… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय विदुरजी के प्रश्न श्रीशुकदेवजी कहते हैं — मैत्रेयजी का यह भाषण सुनकर बुद्धिमान् व्यासनन्दन विदुरजी ने उन्हें अपनी वाणी से प्रसन्न करते हुए कहा ॥ १ ॥ विदुरजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! भगवान् तो शुद्ध… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट् शरीर की उत्पत्ति श्रीमैत्रेय ऋषि ने कहा — सर्वशक्तिमान् भगवान् ने जब देखा कि आपस में संगठित न होने के कारण ये मेरी महतत्त्व आदि शक्तियां विश्व-रचना के कार्य में असमर्थ हो रही हैं, तब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय विदुरजी का प्रश्न और मैत्रेयजी का सृष्टिक्रमवर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परमज्ञानी मैत्रेय मुनि (हरिद्वार क्षेत्र में) विराजमान थे । भगवद्भक्ति से शुद्ध हुए हृदयवाले विदुरजी उनके पास जा पहुँचे और उनके साधुस्वभाव से आप्यायित होकर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय उद्धवजी से विदा होकर विदुरजी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना उद्धवजी ने कहा — फिर ब्राह्मणों की आज्ञा पाकर यादवों ने भोजन किया और वारुणी मदिरा पी । उससे उनका ज्ञान नष्ट हो गया और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय भगवान् के अन्य लीला-चरित्रों का वर्णन उद्धवजी कहते हैं — इसके बाद श्रीकृष्ण अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को सुख पहुँचाने की इच्छा से बलदेवजी के साथ मथुरा पधारे और उन्होंने शत्रुसमुदाय के स्वामी कंस को ऊँचे सिंहासन… Read More