श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूपों की धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्ति का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्माजी ने इसी धारणा के द्वारा प्रसन्न हुए भगवान् से वह सृष्टि-विषयक स्मृति प्राप्त… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय ध्यान-विधि और भगवान् के विराट्स्वरूप का वर्णन श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! तुम्हारा लोकहित के लिये किया हुआ यह प्रश्न बहुत ही उत्तम है । मनुष्यों के लिये जितनी भी बातें सुनने, स्मरण करने या… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय परीक्षित् का अनशनव्रत और शुकदेवजी का आगमन सूतजी कहते हैं — राजधानी में पहुँचने पर राजा परीक्षित् को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिये बड़ा पश्चात्ताप हुआ । वे अत्यन्त उदास हो गये और सोचने लगे… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय राजा परीक्षित् को शृङ्गी ऋषि का शाप सूतजी कहते हैं — अद्भुत कर्मा भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से राजा परीक्षित् अपनी माता की कोख में अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से जल जाने पर भी मरे नहीं ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय महाराज परीक्षित् द्वारा कलियुग का दमन सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! वहाँ पहुँचकर राजा परीक्षित् ने देखा कि एक राजवेषधारी शुद्र हाथ में डंडा लिये हुए है और गाय-बैल के एक जोड़े को इस तरह… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय परीक्षित् की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वी का संवाद सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! पाण्डवों के महाप्रयाण के पश्चात् भगवान् के परम भक्त राजा परीक्षित् श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षा के अनुसार पृथ्वी का शासन करने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय कृष्णविरहव्यथित पाण्डवों का परीक्षित् को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना सूतजी कहते हैं — भगवान् श्रीकृष्ण के प्यारे सखा अर्जुन एक तो पहले ही श्रीकृष्ण के विरह से कृश हो रहे थे, उसपर राजा युधिष्ठिर ने उनकी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का द्वारका से लौटना सूतजी कहते हैं — स्वजनों से मिलने और पुण्यश्लोक भगवान् श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते हैं — यह जानने के लिये अर्जुन द्वारका… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय विदुरजी के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना सूतजी कहते हैं — विदुरजी तीर्थयात्रा में महर्षि मैत्रेय से आत्मा का ज्ञान प्राप्त करके हस्तिनापुर लौट आये । उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय परीक्षित् का जन्म शौनकजी ने कहा — अश्वत्थामा ने जो अत्यन्त तेजस्वी ब्रह्मास्त्र चलाया था, उससे उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया था; परन्तु भगवान् ने उसे पुनः जीवित कर दिया ॥ १ ॥ उस गर्भ… Read More