श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्न ॥ मङ्गलाचरण ॥ जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतः चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट् । तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः । तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा । धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ५ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् सप्ताहयज्ञकी विधि श्रीसनकादि कहते हैं — नारदजी ! अब हम आपको सप्ताहश्रवण की विधि बताते हैं । यह विधि प्रायः लोगों की सहायता और धन से साध्य कही गयी है ॥ १ ॥ पहले तो यत्नपूर्वक ज्योतिषी को बुलाकर मुहूर्त पूछना चाहिये तथा… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ५ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् धुन्धुकारी को प्रेतयोनि की प्राप्ति और उससे उद्धार सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! पिता के वन चले जानेपर एक दिन धुन्धुकारी ने अपनी माता को बहुत पीटा और कहा — ‘बता, धन कहाँ रखा है ? नहीं तो अभी तेरी लुआठी (जलती… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ सूतजी कहते हैं — मुनिवर ! उस समय अपने भक्तों के चित्त में अलौकिक भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ देख भक्तवत्सल श्रीभगवान् अपना धाम छोड़कर वहाँ पधारे ॥ १ ॥ उनके गले में वनमाला शोभा पा रही थी, श्रीअङ्ग सजल जलधर के… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् भक्ति के कष्ट की निवृत्ति नारदजी कहते हैं — अब मैं भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को स्थापित करने के लिये प्रयत्नपूर्वक श्रीशुकदेवजी के कहे हुए भागवतशास्त्र को कथा द्वारा उज्ज्वल ज्ञानयज्ञ करूँगा ॥ १ ॥ यह यज्ञ मुझे कहाँ करना चाहिये, आप इसके… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् भक्ति को दुःख दूर करने के लिये नारदजी का उद्योग नारदजी ने कहा — बाले ! तुम व्यर्थ ही अपने को क्यों खेद में डाल रही हो ? अरे ! तुम इतनी चिन्तातुर क्यों हो ? भगवान् श्रीकृष्ण के चरणकमलों का चिन्तन करो,… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय १ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्य देवर्षि नारद की भक्ति से भेंट (अनुष्टुप्) सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे । तापत्रविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः ॥ १ ॥ सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् श्रीकृष्ण को हम नमस्कार करते हैं, जो जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों प्रकार के तापों… Read More
श्रीमद्भागवत-सप्ताह की आवश्यक विधि श्रीमद्भागवत-सप्ताह की आवश्यक विधि 1. श्रीमद्भागवत-माहात्म्य 2. श्रीमद्भागवत – श्रीशुकदेवजी को नमस्कार 3. श्रीमद्भागवत की पूजनविधि 4. श्रीमद्भागवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान पुराण में श्रीमद्भागवत के सप्ताहपारायण तथा श्रवण की बड़ी भारी महिमा बतलायी गयी है, अतः यहाँ श्रीमद्भागवत-प्रेमियों के लिये संक्षेप में सप्ताह-यज्ञ की आवश्यक विधि का दिग्दर्शन कराया जाता है ।… Read More
श्रीमद्भागवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रार्थना वन्दे श्रीकृष्णदेवं मुरनरकभिदं वेदवेदान्तवेद्यं लोके भक्तिप्रसिद्धं यदुकुलजलधौ प्रादुरासीदपारे । यस्यासीद् रूपमेवं त्रिभुवनतरणे भक्तिवच्च स्वतन्त्रं शास्त्रं रूपं च लोके प्रकटयति मुदा यः स नो भूतिहेतुः ॥ जो इस जगत् में भक्ति से ही प्राप्त होते हैं, जिनका तत्त्व वेद और वेदान्त के द्वारा ही जाननेयोग्य है,… Read More
श्रीमद्भागवत की पूजनविधि श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रातःकाल स्नान के पश्चात् अपना नित्य-नियम समाप्त करके पहले भगवत्-सम्बन्धी स्तोत्रों एवं पदों के द्वारा मंगलाचरण और वन्दना करे । इसके बाद आचमन और प्राणायाम करके — ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैङ्गैस्तुष्टु वा ँ्सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ १ ॥ — इत्यादि मन्त्रों… Read More