श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-01 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पहला अध्याय श्रीसूत-शौनक-संवाद में महाभागवत [ देवीपुराण ]-का प्रारम्भ। महाभागवत की रचना के लिये भगवती दुर्गा की उपासना। भगवती का प्रकट होकर अपने चरणतल में स्थित सहस्रदलकमल में परमाक्षरों में उत्कीर्ण महाभागवत [देवीपुराण]-का व्यासजी को दर्शन कराना और पुनः व्यासजी द्वारा महाभागवत की रचना अथ… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण] – सिंहावलोकन यामाराध्य विरिञ्चिरस्य जगतः स्रष्टा हरिः पालकः संहर्ता गिरिशः स्वयं समभवद्धयेया च या योगिभिः । यामाद्यां प्रकृतिं वदन्ति मुनयस्तत्त्वार्थविज्ञाः परां तां देवीं प्रणमामि विश्वजननीं स्वर्गापवर्गप्रदाम् ॥ जिनकी आराधना करके स्वयं ब्रह्माजी इस जगत् के सृजनकर्ता हुए, भगवान् विष्णु पालनकर्ता हुए तथा भगवान् शिव संहार करनेवाले हुए, योगिजन जिनका ध्यान करते हैं और… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण की महिमा श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण-श्रवणफलवर्णनम् सूतजी बोले — पराम्बा देवी के मुखकमल से वेद- सिद्धान्त का बोधक जो आधा श्लोक [^1]  निकला था और जिसका उपदेश स्वयं देवी ने वट-पट पर शयन करने वाले विष्णु को किया था,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय राजा जनमेजय द्वारा अम्बा यज्ञ और श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण का माहात्म्य जनमेजयेनाम्बामखकरण-देवीभागवतश्रवणपूर्वकं स्वपित्रुद्धारवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! हे अनघ ! आपने मुझसे जो-जो पूछा था, वह मैंने आपको बता दिया, जिसे पूर्व में नारायण ने महात्मा नारद… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय भगवती जगदम्बा के मण्डप का वर्णन तथा मणिद्वीप की महिमा मणिद्वीपवर्णनम् व्यासजी बोले — त्रिकोण के मध्यभाग में भगवती जगदम्बा का वही चिन्तामणि नामक भवन विराजमान है। उसमें हजार स्तम्भों वाले चार मण्डप विद्यमान हैं ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय मणिद्वीप के रत्नमय नौ प्राकारों का वर्णन पद्मरागादिमणिविनिर्मितप्राकारवर्णनम् व्यासजी बोले — पुष्परागनिर्मित प्राकार के आगे कुमकुम के समान अरुण विग्रह वाला पद्मरागमणियुक्त प्राकार है, जिसके मध्य में भूमि भी उसी प्रकार की है । अनेक गोपुर और… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय मणिद्वीप का वर्णन मणिद्वीपवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे महाराज जनमेजय ! ] ब्रह्मलोक से ऊपर के भाग में जो सर्वलोक सुना गया है, वही मणिद्वीप है; जहाँ भगवती विराजमान रहती हैं ॥ १ ॥ चूँकि यह… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय भगवती गायत्री की कृपा से गौतम के द्वारा अनेक ब्राह्मण परिवारों की रक्षा, ब्राह्मणों की कृतघ्नता और गौतम के द्वारा ब्राह्मणों को घोर शाप-प्रदान ब्राह्मणादीनां गायत्रीभिन्नान्यदेवोपासनाश्रद्धाहेतुनिरूपणम् व्यासजी बोले — हे विभो ! एक समय की बात है,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय देवताओं का विजयगर्व तथा भगवती उमा द्वारा उसका भंजन, भगवती उमा का इन्द्र को दर्शन देकर ज्ञानोपदेश देना पराशक्तेराविर्भाववर्णनम् जनमेजय बोले — सम्पूर्ण शास्त्रवेत्ताओं में श्रेष्ठ तथा समस्त धर्मों को जानने वाले हे भगवन् ! सभी द्विजातियों… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय दीक्षाविधि मन्त्रदीक्षाविधिवर्णनम् नारदजी बोले — [हे भगवन् ! ] मैंने यह श्रीगायत्रीदेवी का सहस्रनाम संज्ञक श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाला, महान् उन्नति की प्राप्ति कराने वाला तथा महान् भाग्योदय करने वाला स्तोत्र सुन लिया। अब मैं दीक्षा… Read More