श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-17 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-सप्तदशोऽध्यायः सत्रहवाँ अध्याय विश्वामित्र का शुनःशेप को वरुणमन्त्र देना और उसके जप से वरुण का प्रकट होकर उसे बन्धनमुक्त तथा राजा को रोगमुक्त करना, राजा हरिश्चन्द्र की प्रशंसा से विश्वामित्र का वसिष्ठ पर क्रोधित होना वसिष्ठविश्वामित्रपणवर्णनम् व्यासजी बोले — राजन्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-16 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-षोडशोऽध्यायः सोलहवाँ अध्याय राजा हरिश्चन्द्र का शुनःशेप को स्तम्भ में बाँधकर यज्ञ प्रारम्भ करना यज्ञपशुभूतस्य ब्राह्मणपुत्रस्य वधकरणाय विश्वामित्रनिषेधवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन् ! ] वरुणदेव के चले जाने पर राजा हरिश्चन्द्र [ जलोदर ] रोग से अत्यन्त पीड़ित… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-15 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चदशोऽध्यायः पन्द्रहवाँ अध्याय प्रतिज्ञा पूर्ण न करने से वरुण का क्रुद्ध होना और राजा हरिश्चन्द्र को जलोदरग्रस्त होने का शाप देना हरिश्चन्द्रस्य जलोदरव्याधिप्राप्तिवर्णनम् व्यासजी बोले — [ राजा जनमेजय !] राजा हरिश्चन्द्र के घर में पुत्र का जन्मोत्सव मनाया जा… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय विश्वामित्र का सत्यव्रत ( त्रिशंकु ) – को सशरीर स्वर्ग भेजना, वरुणदेव की आराधना से राजा हरिश्चन्द्र को पुत्र की प्राप्ति वरुणकृपया शैव्यायां पुत्रोप्तत्तिवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! महातपस्वी गाधिपुत्र विश्वामित्र ने यज्ञानुष्ठान का विचार… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय राजर्षि विश्वामित्र का अपने आश्रम में आना और सत्यव्रत द्वारा किये गये उपकार को जानना त्रिशङ्कुशापोद्धाराय विश्वामित्रसान्त्वनवर्णनम् राजा [ जनमेजय ] बोले — [ हे व्यासजी ! ] राजा त्रिशंकु के आदेश से सचिवों ने हरिश्चन्द्र को… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय राजा सत्यव्रत को महर्षि वसिष्ठ का शाप तथा युवराज हरिश्चन्द्र का राजा बनना त्रिशङ्कूपाख्यानवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे महाराज जनमेजय !] इस प्रकार पिता के समझानेपर राजकुमार त्रिशंकु ने हाथ जोड़कर प्रेमपूर्वक गद्गद वाणी में पिता… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय भगवती जगदम्बा की कृपा से सत्यव्रत का राज्याभिषेक और राजा अरुण द्वारा उन्हें नीतिशास्त्र की शिक्षा देना सत्यव्रताय राजनीत्युपदेशवर्णनम् जनमेजय बोले — हे महामते ! वसिष्ठजी द्वारा शापित वह राजकुमार त्रिशंकु उस शाप से किस प्रकार मुक्त… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय सूर्यवंशी राजा अरुण द्वारा राजकुमार सत्यव्रत का त्याग, सत्यव्रत का वन में भगवती जगदम्बा के मन्त्र – जप में रत होना सत्यव्रताख्यानवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे जनमेजय !] वे महाराज मान्धाता सत्यप्रतिज्ञ तथा चक्रवर्ती नरेश हुए।… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय सूर्यवंशी राजाओं के वर्णन के क्रम में राजा ककुत्स्थ, युवनाश्व और मान्धाता की कथा मान्धातोत्पत्तिवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! किसी समय अष्टका-श्राद्ध के अवसर पर बुद्धिमान् भूपति इक्ष्वाकु ने विकुक्षि को आज्ञा दी कि हे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय राजा रेवत की कथा इक्ष्वाकुवंशवर्णनम् जनमेजय बोले — हे ब्रह्मन् ! मेरे मन में यह महान् संशय हो रहा है कि स्वयं राजा रेवत अपनी कन्या रेवती को साथ लेकर ब्रह्मलोक चले गये। मैंने पूर्वकाल में ब्राह्मणों… Read More