अग्निपुराण – अध्याय 236 अग्निपुराण – अध्याय 236 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छत्तीसवाँ अध्याय संग्राम-दीक्षा-युद्ध के समय पालन करने योग्य नियमों का वर्णन रणदीक्षा पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब मैं रणयात्रा की विधि बतलाते हुए संग्रामकाल के लिये उचित कर्तव्यों का वर्णन करूँगा। जब राजा की युद्धयात्रा एक… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 235 अग्निपुराण – अध्याय 235 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पैंतीसवाँ अध्याय राजा की नित्यचर्या प्रात्यहिकराजकर्म पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब निरन्तर किये जाने योग्य कर्म का वर्णन करता हूँ, जिसका प्रतिदिन आचरण करना उचित है। जब दो घड़ी रात बाकी रहे तो राजा नाना प्रकार… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 234 अग्निपुराण – अध्याय 234 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौंतीसवाँ अध्याय दण्ड, उपेक्षा, माया और साम आदि नीतियों का उपयोग उपायषड्गुण्यम् पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! साम, भेद, दान और दण्ड की चर्चा हो चुकी है और अपने राज्य में दण्ड का प्रयोग कैसे करना चाहिये… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 233 अग्निपुराण – अध्याय 233 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तैंतीसवाँ अध्याय यात्रा के मुहूर्त और द्वादश राजमण्डल का विचार यात्रामण्डलचिन्तादिः पुष्कर कहते हैं — अब मैं राजधर्म का आश्रय लेकर सबकी यात्रा के विषय में बताऊँगा। जब शुक्र अस्त हों अथवा नीच स्थान में स्थित हों, विकलाङ्ग… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 232 अग्निपुराण – अध्याय 232 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बत्तीसवाँ अध्याय कौए, कुत्ते, गौ, घोड़े और हाथी आदि के द्वारा होनेवाले शुभाशुभ शकुनों का वर्णन शकुनानि पुष्कर कहते हैं — जिस मार्ग से बहुतेरे कौए शत्रु के नगर में प्रवेश करें, उसी मार्ग से घेरा डालने पर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 231 अग्निपुराण – अध्याय 231 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इकतीसवाँ अध्याय शकुन के भेद तथा विभिन्न जीवों के दर्शन से होनेवाले शुभाशुभ फल शकुनानि पुष्कर कहते हैं — राजा के ठहरने, जाने अथवा प्रश्न करने के समय होने वाले शकुन उसके देश और नगर के लिये शुभ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 230 अग्निपुराण – अध्याय 230 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तीसवाँ अध्याय अशुभ और शुभ शकुन शकुनानि पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! श्वेत वस्त्र, स्वच्छ जल, फल से भरा हुआ वृक्ष, निर्मल आकाश, खेत में लगे हुए अन्न और काला धान्य- इनका यात्रा के समय दिखायी देना… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 229 अग्निपुराण – अध्याय 229 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनतीसवाँ अध्याय अशुभ और शुभ स्वप्नों का विचार स्वप्नाध्यायः पुष्कर कहते हैं — अब मैं शुभाशुभ स्वप्नों का वर्णन करूँगा तथा दुःस्वप्न-नाश के उपाय भी बतलाऊँगा । नाभि के सिवा शरीर के अन्य अंगों में तृण और वृक्षों… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 228 अग्निपुराण – अध्याय 228 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय युद्ध–यात्रा के सम्बन्ध में विचार युद्धयात्रा पुष्कर कहते हैं — जब राजा यह समझ ले कि किसी बलवान् आक्रन्द [^1] (राजा) के द्वारा मेरा पार्ष्णिग्राह[^2] राजा पराजित कर दिया गया है तो वह सेना को युद्ध… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 227 अग्निपुराण – अध्याय 227 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्ताईसवाँ अध्याय अपराधों के अनुसार दण्ड के प्रयोग राजधर्माः दण्डप्रणयनं पुष्कर कहते हैं — राम! अब मैं दण्डनीति का प्रयोग बतलाऊँगा, जिससे राजा को उत्तम गति प्राप्त होती है। तीन जौ का एक ‘कृष्णल’ समझना चाहिये, पाँच कृष्णल… Read More