गर्भ-स्तम्भन मन्त्रः- “शुद्ध बुद्ध को ठकुरा बाँधो, गर्भ रहे जी ठहर पाके फूटे बीज गिरे । श्री रामचन्द्र जी, हत्या तोहे परे । ईश्वर तेरी साख, गौरा गाँडा बाँध के नौ महीना राख । ताला झिन्ना न झरै, पट-पट बीधे ताल । लोहू जामुन दे गए, ब्रह्मा और मुरार । ऊँचे चढ़े न नीचे धँसे,… Read More


रोगों की झाड़नी मन्त्रः- “खेरे पै की आमली, अगल-बगल की डार । ऊपर मोती गा गहे, तर भैंसा रखवार । वा भैंसा न जानिए, पालै तेली कलार । नौ गगरा मद के पिए, नौ सौ बकरा खाय । सांझी बाबा को चीर-फार, शिव बाबा की जटा उखार । छत्तीस रोग हांक के न आवे, तो… Read More


हनुमान शाबर मन्त्रः- “निज ध्यान धूप, शिव वीर हनुमान, जटा – जूट अवधूत, जङ्ग जञ्जीर, लँगोट गाढ़ो । भूत को वश, परीत को वश, गदा तेल सिन्दूर चढ़े । आप देखे, तो सत्य की नाव नारसिंह खेवे । दुष्ट को लात बजरङ्ग देवे । भक्त की कड़ी आठ लाख अस्सी हजार वश कर । रावण… Read More


आत्म-रक्षा-मन्त्र मन्त्रः- “चन्दा बाँधों, सूरज बाँधों । बाँधों गङ्गा माई । तेंतीस कोटि के देवता बाँधों । हनुमत की राम दुहाई । मरघट का मसान बाँधों । मन चाहे लड्‌डू खाऊँ । पूजा करूँ गणेश की । मन चाहे जहाँ चला जाऊँ । श्री हनुमान जी की राम दुहाई ।।”… Read More


वशीकरण मन्त्रः- “ॐ नमो फूल सुगन्धा । फूल ही बाँधूँ सात समुद्रा । अहो फूल झटियारा, चौंसठ जोगिनी खरा प्यारा । ए फूल ए दिन पाऊँ, सूती सुवासिनी सेज बुलाऊँ । मुआ मड़ा मसान जगाऊँ, हाक करी उचाट लाऊँ । गलिहट मेरे पगे लगाऊँ । देखूँ गोरा भैरव ! तेरी शक्ति । मेरी भक्ति, गुरू… Read More


विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आठ-भुजी अम्बिका, एक नाम ओङ्कार । खट्-दर्शन त्रिभुवन में, पाँच पण्डवा सात दीप । चार खूँट नौ खण्ड में, चन्दा-सूरज दो प्रमाण । हाथ जोड़ बिनती करूँ, मम करो कल्याण ।।”… Read More


व्यापार-वर्धन मन्त्रः- “भँवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा । उठै जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर, सोखे नहिं जाय ।।”… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी विपरीत चालन मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरू का, एक ठौ सरसों सोला राई, मोरो पठ-वल कोरो जाई । खाय-खाय पड़ै मार, जे करै ते मरै । उलट विद्या ताही पर पड़ै । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा । फुरौ भर, ईश्वरी वाचा । दुहाई माता अञ्जनी की ।।”… Read More


।। श्री क्रम के कुलगुरु ।। श्रीकुल साधकों के कुल गुरु इस प्रकार है- दिव्यौघगुरु – १. परप्रकाशानंदनाथ २. परशिवानंदनाथ ३. पराशक्त्यम्ब ४. कौलेश्वरानंदनाथ ५. शुक्लदेव्यम्ब ६. कुलेश्वरानंदनाथ ७. कामेश्वर्यम्बा ।… Read More


।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More