ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 129 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ उनतीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के गोलोक-गमन का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! परिपूर्णतम प्रभु भगवान् श्रीकृष्ण वहाँ तत्काल ही गोकुलवासियों के सालोक्य मोक्ष को देखकर भाण्डीरवन में वटवृक्ष के नीचे पाँच गोपों के साथ ठहर गये। वहाँ उन्होंने देखा कि… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 128 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ अठ्ठाईसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण द्वारा नन्द को ज्ञानोपदेश और राधा-कलावती आदि गोपियों का गोलोक-गमन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! जहाँ पहले ब्राह्मणपत्नियों ने श्रीकृष्ण को अन्न दिया था; उस भाण्डीर-वट की छाया में श्रीकृष्ण स्वयं विराजमान हुए और वहीं समस्त गोपों… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 127 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का राधा के साथ विभिन्न स्थलों में विहार करके पुनः गोकुल में जाना, वहाँ उनका स्वागत-सत्कार, यशोदा का राधा सहित श्रीकृष्ण को महल में ले जाना और मङ्गल-महोत्सव करना तदनन्तर राधिका ने कहा — महाभाग ! अब… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 126 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ छब्बीसवाँ अध्याय राधा और श्रीकृष्ण का पुनः मिलाप, राधा के पूछने पर श्रीकृष्ण द्वारा अपना तथा राधा का रहस्योद्घाटन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इस प्रकार माधव ने यादवों, देवों, मुनियों तथा अन्यान्य व्यक्तियों और देवियों के साथ गणेश-पूजन का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 125 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ पच्चीसवाँ अध्याय वसुदेवजी का शंकरजी से भव-तरण का उपाय पूछना, शंकरजी का उन्हें ज्ञानोपदेश देकर राजसूय-यज्ञ करने का आदेश देना, वसुदेवजी द्वारा राजसूय यज्ञ का अनुष्ठान और यज्ञान्त में सर्वस्व दक्षिणा में देकर उनका द्वारका को लौटना नारदजी ने पूछा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 124 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ चौबीसवाँ अध्याय गणेशकृत राधा-प्रशंसा, पार्वती-राधा-सम्भाषण, पार्वती के आदेश से सखियों द्वारा राधा का शृङ्गार और उनकी विचित्र झाँकी; ब्रह्मा, शिव, अनन्त आदि के द्वारा राधा की स्तुति श्रीनारायण कहते हैं — नारद! सती राधा ने गणेश की विधिपूर्वक भली-भाँति पूजा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 123 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तेईसवाँ अध्याय गणेश के अग्रपूज्यत्व-वर्णन के प्रसङ्ग में राधा द्वारा गणेश की अग्रपूजा का कथन नारदजी ने पूछा — मुने ! पुराणों में जो गणेश-पूजन का दुर्लभ आख्यान वर्णित है, उसे मैंने सामान्यतया ब्रह्मा के मुख से संक्षेप में सुना… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 122 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बाईसवाँ अध्याय स्यमन्तक मणि का उपाख्यान नारद बोले — कृष्ण के साथ सभी रमणियों का विवाह तो आपने हर्षपूर्वक बता दिया, किन्तु स्यमन्तक मणि का उपाख्यान अभीष्ट है । हे महाभाग ! वह मैंने नहीं सुना है, उसे आप (… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 121 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ इक्कीसवाँ अध्याय शृगालोपाख्यान श्रीनारायण कहते हैं — नारद! एक समय की बात है। श्रीकृष्ण अपने गणों के साथ सुधर्मा- सभा में विराजमान थे। उसी समय वहाँ एक ब्राह्मणदेवता आये, जो ब्रह्मतेज से प्रज्वलित हो रहे थे। वहाँ आकर उन्होंने पुरुषोत्तम… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 120 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बीसवाँ अध्याय बाण का यादवी सेना के साथ युद्ध, बाण का धराशायी होना, शंकरजी का बाण को उठाकर श्रीकृष्ण के चरणों में डाल देना, श्रीकृष्ण द्वारा बाण को जीवन-दान, बाण का श्रीकृष्ण को बहुत-से दहेज के साथ अपनी कन्या समर्पित… Read More