पाशुपतास्त्र प्रयोगः August 15, 2019 | aspundir | 2 Comments ॥ पाशुपतास्त्र प्रयोगः ॥ भगवान शिव का पशुपति प्रयोग ग्रह बाधा, क्षुद्र रोग, पशुता (जड़ता) का नाश करने वाला प्रज्ञा एवं बुद्धि प्रदाता तथा पालनकर्ता एवं प्रबल संहारक मंत्र है । अति आवश्यकता में ही शत्रुसंहार हेतु प्रयोग किया जाता है । मन्त्रोद्धार – तारो (ॐ) वान्तो (श) धरा (ल) संस्थो, वामनेत्रन्दु भूषितः (ईकार विन्दु)… Read More
अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः August 15, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः ॥ सामान्य क्रम में अश्वशान्ति, गजशांति, महामारी, राजकीय उपद्रव, प्रेत, शत्रुबाधा असामयिक गर्भपात शान्ति हेतु इस मन्त्र का प्रयोग किया जा सकता है । इसके साथ में शिवपूजा, ईशानदि देवों का पूजन करना चाहिये । शारदा तिलक व अग्निपुराण में इनका विधान है । ॥ अघोरास्त्र मंत्र ॥ “ह्रीं स्फुर स्फुर… Read More
ईशानादि पंचवक्त्र पूजा August 15, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ ईशानादि पंचवक्त्र पूजा ॥ ॥ ईशानादि मंत्र ॥ (ॐ) ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां, ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्माणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम् ॥ १ ॥ (ॐ) तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥ २ ॥ (ॐ) अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः । सर्वतः सर्वसर्वेभ्यो नमस्तेऽस्तु रुद्ररूपेभ्यः ॥ ३ ॥ (ॐ) वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः… Read More
रक्षा बन्धन विधि August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment रक्षा बन्धन विधि शुद्ध होकर आसन पर बैठे । फिर ‘गायत्री – मन्त्र’ से ‘आचमन करे । आयुष्य, शुभ, शान्ति – प्राप्ति हेतु गौरी – सहित कश्यप आदि सप्त – ऋषियों का श्रद्धा – पूर्वक ‘आवाहन’ कर उन्हें प्रतिष्ठित करे । यथा – साम्वत्सरिक – योग – क्षेमार्थ गौर्या – सह कश्यपादि – सप्त –… Read More
शिव स्तुतिः August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अथ सदाशिव स्तोत्र प्रारम्भः ॥ धरापोऽग्निमरुद्व्योममखेशेन्द्वर्कमूर्तये । सर्वभूतान्तरस्थाय शङ्कराय नमो नमः ॥ १ ॥ १॰ पृथ्वी, २. जल, ३. अग्नि, ४. वायु, ५. आकाश, ६. यजमान, ७. सूर्य और ८. चन्द्ररूप से अष्टमूर्ति रूप धारण कर समस्त प्राणियों के अन्त:स्थित भगवान् शंकर को हम बारम्बार नमस्कार करते हैं ॥ श्रुत्यन्तकृतर्वासाय श्रुतये श्रुतिजन्मने । अतीन्द्रियाय… Read More
चण्डेश्वर मंत्र: August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ चण्डेश्वर मंत्र: ॥ चण्ड व वाण नाम के असुर गणों को वरदान देने से शिव चण्डेश्वर कहलाये जाते हैं । त्र्यक्षर मंत्र: – (मंत्र कोष) “ॐ हुं फट ।” (शारदा तिलक व हिन्दी तंत्रसारे) “उर्ध्व फट् ।” ऋष्यादि – मंत्रकोष के अनुसार ऋषि त्रिक हैं, तंत्रसार में इसे त्रित लिखा है । छंद अनुष्टुप्… Read More
अर्द्धनारीश्वर August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अर्द्धनारीश्वर ॥ (शिव तन्त्रे) मंत्र – (षडाक्षर) ‘रक्षं मं यं औं ऊं’ (मतांतरे शारद तिलके – ऊः) विनियोग – ॐ अर्द्धनारीश्वर मंत्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः अर्द्धनारीश्वर देवता सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः – कश्यप ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टप् छंदसे नमः मुखे, अर्द्धनारीश्वर देवतायै नमः हृदि, विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । अङ्गन्यासः – मंत्र… Read More
मंजुघोष प्रयोगः August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अथ मंजुघोष प्रयोगः ॥ मंजुघोष का प्रयोग शिव प्रयोगों में विद्या प्राप्ति हेतु विशेष माना जाता है । इस . विषय में शिव कहते है – श्रुणु देवि ! महामंत्रं साधकानां सुखावहम् । यज्ज्ञात्वा जड़धीः प्रायो वाचस्पति समो भवेत् ॥ जपेत् सिद्धिप्रदं सद्यो वैष्णवं सात्विकात्मकम् । शैवसिद्धिप्रदं सद्यस्तामसं समुदाहृतम् ॥ अर्थात् इसकी सात्विक उपासना… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का ‘रुद्रशिर’ नाम पड़ने का कारण, सती एवं शिव का विवाहोत्सव, विवाह के अनन्तर शिव और सती का वृषभारूढ़ हो कैलास के लिये प्रस्थान नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! हे शिवभक्त… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय शिव का सती के साथ विवाह, विवाह के समय शम्भु की माया से ब्रह्मा का मोहित होना और विष्णु द्वारा शिवतत्त्व का निरूपण ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार कन्यादानकर दक्ष ने भगवान् शंकर को अनेक प्रकार के… Read More