श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २० March 16, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोकपर्वत का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! अब परिमाण, लक्षण और स्थिति के अनुसार लक्षादि अन्य द्वीपों के वर्षविभाग का वर्णन किया जाता है ॥ १ ॥ जिस प्रकार मेरु… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १९ March 16, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय किम्पुरुष और भारतवर्ष का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! किम्पुरुषवर्ष में श्रीलक्ष्मणजी के बड़े भाई, आदिपुरुष, सीताहृदयाभिराम भगवान् श्रीराम के चरणों की सन्निधि के रसिक परम भागवत श्रीहनुमान् जी अन्य किन्नरों के सहित अविचल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १८ March 16, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय भिन्न-भिन्न वर्षों का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! भद्राश्ववर्ष में धर्मपुत्र भद्रश्रवा और उनके मुख्य-मुख्य सेवक भगवान् वासुदेव की हयग्रीवसंज्ञक धर्ममयी प्रिय मूर्ति को अत्यन्त समाधिनिष्ठा के द्वारा हृदय में स्थापित कर इस मन्त्र… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १७ March 16, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय गङ्गाजी का विवरण और भगवान् शङ्करकृत संकर्षणदेव की स्तुति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! जब राजा बलि की यज्ञशाला में साक्षात् यज्ञमूर्ति भगवान् विष्णु ने त्रिलोकी को नापने के लिये अपना पैर फैलाया, तब उनके… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १६ March 16, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय भुवनकोश का वर्णन राजा परीक्षित् ने कहा — मुनिवर ! जहाँ तक सूर्य का प्रकाश है और जहाँ तक तारागण के सहित चन्द्रदेव दीख पड़ते हैं, वहाँ तक आपने भूमण्डल का विस्तार बतलाया है ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १५ March 14, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय भरत के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! भरतजी का पुत्र सुमति था, यह पहले कहा जा चुका है । उसने ऋषभदेवजी के मार्ग का अनुसरण किया । इसीलिये कलियुग में बहुत-से पाखण्डी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १४ March 14, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय भवाटवी का स्पष्टीकरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! देहाभिमानी जीवों के द्वारा सत्त्वादि गुणों के भेद से शुभ, अशुभ और मिश्र–तीन प्रकार के कर्म होते रहते हैं । उन कर्मों के द्वारा ही निर्मित नाना… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १३ March 14, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय भवाटवी का वर्णन और रहूगण का संशयनाश जडभरत ने कहा — राजन् ! यह जीवसमूह सुखरूप धन में आसक्त देश-देशान्तर में घूम-फिरकर व्यापार करनेवाले व्यापारियों के दल के समान हैं । इसे माया ने दुस्तर प्रवृत्तिमार्ग… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १२ March 14, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान राजा रहूगण ने कहा — भगवन् ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ । आपने जगत् का उद्धार करने के लिये ही यह देह धारण की है । योगेश्वर ! अपने परमानन्दमय… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ११ March 12, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय राजा रहूगण को भरतजी का उपदेश जड़भरत ने कहा — राजन् ! तुम अज्ञानी होने पर भी पण्डितों के समान ऊपर-ऊपर की तर्क-वितर्कयुक्त बात कह रहे हो । इसलिये श्रेष्ठ ज्ञानियों में तुम्हारी गणना नहीं हो… Read More