श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय जड़भरत और राजा रहूगण की भेंट श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! एक बार सिन्धुसौवीर देश का स्वामी राजा रहूगण पालकी पर चढ़कर जा रहा था । जब वह इक्षुमती नदी के किनारे पहुँचा तब उसकी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय भरतजी का ब्राह्मणकुल में जन्म श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! आङ्गिरस गोत्र में शम, दम, तप, स्वाध्याय, वेदाध्ययन, त्याग (अतिथि आदि को अन्न देना), सन्तोष, तितिक्षा, विनय, विद्या (कर्मविद्या), अनसूया (दूसरों के गुणों में दोष… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय भरतजी को मृग के मोह में फँसकर मृग-योनि में जन्म लेना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — एक बार भरतजी गण्डकी में स्नान कर नित्य-नैमित्तिक तथा शौचादि अन्य आवश्यक कृत्यों से निवृत्त हो प्रणव का जप करते हुए… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय भरत-चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! महाराज भरत बड़े ही भगवद्भक्त थे । भगवान् ऋषभदेव ने अपने संकल्पमात्र से उन्हें पृथ्वी की रक्षा करने के लिये नियुक्त कर दिया । उन्होंने उनकी आशा में स्थित… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय ऋषभदेवजी का देहत्याग राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! योगरूप वायु से प्रचलित हुई ज्ञानाग्नि से जिनके रागादि कर्मबीज दग्ध हो गये हैं उन आत्माराम मुनियों को दैववश यदि स्वयं ही अणिमादि सिद्धियाँ प्राप्त हो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय ऋषभजीका अपने पुत्रों को उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना श्रीऋषभदेवजी ने कहा — पुत्रो ! इस मर्त्यलोक में यह मनुष्य-शरीर दुःखमय विषयभोग प्राप्त करने के लिये ही नहीं हैं । ये भोग तो विष्ठाभोजी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय ऋषभदेवजी का राज्यशासन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! नाभिनन्दन अंग जन्म से ही भगवान् विष्णु के वज्र-अङ्कुश आदि चिह्नों से युक्त थे । समता, शान्ति, वैराग्य और ऐश्वर्य आदि महाविभूतियों के कारण उनका प्रभाव दिनों-दिन… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय राजा नाभि का चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! आग्नीध्र के पुत्र नाभि के कोई सन्तान न थी, इसलिये उन्होंने अपनी भार्या मेरुदेवी के सहित पुत्र की कामना से एकाग्रतापूर्वक भगवान् यज्ञपुरुष का यजन किया… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय आग्नीध्र-चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — पिता प्रियव्रत के इस प्रकार तपस्या में संलग्न हो जाने पर राजा आग्नीध्र उनकी आज्ञा का अनुसरण करते हुए जम्बूद्वीप की प्रजा का धर्मानुसार पुत्रवत् पालन करने लगे ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय प्रियव्रत-चरित्र राजा परीक्षित् ने पूछा — मुने ! महाराज प्रियव्रत तो बड़े भगवद्भक्त और आत्माराम थे । उनकी गुहस्थाश्रम में कैसे रुचि हुई, जिसमें फँसने के कारण मनुष्य को अपने स्वरूप की विस्मृति होती है और… Read More