श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ९ January 26, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी का भगवद्धामदर्शन और भगवान् के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवत का उपदेश श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जैसे स्वप्न में देखे जानेवाले पदार्थों के साथ उसे देखनेवाले का कोई सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही देहादि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ८ January 25, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय राजा परीक्षित् के विविध प्रश्न राजा परीक्षित् ने कहा — भगवन् ! आप वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ । मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि जब ब्रह्माजी ने निर्गुण भगवान् के गुणों का वर्णन करने के लिये… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ७ January 25, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय भगवान् के लीलावतारों की कथा ब्रह्माजी कहते हैं — अनन्त भगवान् ने प्रलय के जल में डूबी हुई पृथ्वी का उद्धार करने के लिये समस्त यज्ञमय वराह-शरीर ग्रहण किया था । आदिदैत्य हिरण्याक्ष जल के अंदर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ६ January 25, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट्स्वरूप की विभूतियों का वर्णन ब्रह्माजी कहते हैं — उन्हीं विराट् पुरुष के मुख से वाणी और उसके अधिष्ठातृदेवता अग्नि उत्पन्न हुए हैं । सातों छन्द… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ५ January 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय सृष्टि-वर्णन नारदजी ने पूछा — पिताजी ! आप केवल मेरे ही नहीं, सबके पिता, समस्त देवताओं से श्रेष्ठ एवं सृष्टिकर्ता हैं । आपको मेरा प्रणाम है । आप मुझे यह ज्ञान दीजिये, जिससे आत्मतत्त्व का साक्षात्कार… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ४ January 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय राजा का सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजी का कथारम्भ सूतजी कहते हैं — शुकदेवजी के वचन भगवत्तत्त्व का निश्चय करानेवाले थे । उत्तरानन्दन राजा परीक्षित् ने उन्हें सुनकर अपनी शुद्ध बुद्धि भगवान् श्रीकृष्ण के चरणों में अनन्यभाव… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ३ January 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय कामनाओं के अनुसार विभिन्न देवताओं की उपासना तथा भगवद्भक्ति के प्राधान्य का निरूपण श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! तुमने मुझसे जो पूछा था कि मरते समय बुद्धिमान् मनुष्य को क्या करना चाहिये, उसका उत्तर मैंने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय २ January 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूपों की धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्ति का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्माजी ने इसी धारणा के द्वारा प्रसन्न हुए भगवान् से वह सृष्टि-विषयक स्मृति प्राप्त… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १ January 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय ध्यान-विधि और भगवान् के विराट्स्वरूप का वर्णन श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! तुम्हारा लोकहित के लिये किया हुआ यह प्रश्न बहुत ही उत्तम है । मनुष्यों के लिये जितनी भी बातें सुनने, स्मरण करने या… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १९ January 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय परीक्षित् का अनशनव्रत और शुकदेवजी का आगमन सूतजी कहते हैं — राजधानी में पहुँचने पर राजा परीक्षित् को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिये बड़ा पश्चात्ताप हुआ । वे अत्यन्त उदास हो गये और सोचने लगे… Read More