श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय राजा परीक्षित् को शृङ्गी ऋषि का शाप सूतजी कहते हैं — अद्भुत कर्मा भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से राजा परीक्षित् अपनी माता की कोख में अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से जल जाने पर भी मरे नहीं ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय महाराज परीक्षित् द्वारा कलियुग का दमन सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! वहाँ पहुँचकर राजा परीक्षित् ने देखा कि एक राजवेषधारी शुद्र हाथ में डंडा लिये हुए है और गाय-बैल के एक जोड़े को इस तरह… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय परीक्षित् की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वी का संवाद सूतजी कहते हैं — शौनकजी ! पाण्डवों के महाप्रयाण के पश्चात् भगवान् के परम भक्त राजा परीक्षित् श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षा के अनुसार पृथ्वी का शासन करने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय कृष्णविरहव्यथित पाण्डवों का परीक्षित् को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना सूतजी कहते हैं — भगवान् श्रीकृष्ण के प्यारे सखा अर्जुन एक तो पहले ही श्रीकृष्ण के विरह से कृश हो रहे थे, उसपर राजा युधिष्ठिर ने उनकी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का द्वारका से लौटना सूतजी कहते हैं — स्वजनों से मिलने और पुण्यश्लोक भगवान् श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते हैं — यह जानने के लिये अर्जुन द्वारका… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय विदुरजी के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना सूतजी कहते हैं — विदुरजी तीर्थयात्रा में महर्षि मैत्रेय से आत्मा का ज्ञान प्राप्त करके हस्तिनापुर लौट आये । उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय परीक्षित् का जन्म शौनकजी ने कहा — अश्वत्थामा ने जो अत्यन्त तेजस्वी ब्रह्मास्त्र चलाया था, उससे उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया था; परन्तु भगवान् ने उसे पुनः जीवित कर दिया ॥ १ ॥ उस गर्भ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत सूतजी कहते हैं — श्रीकृष्ण ने अपने समृद्ध आनर्स देश में पहुँचकर वहाँ के लोगों की विरह-वेदना बहुत कुछ शान्त करते हुए अपना श्रेष्ठ पाञ्चजन्य नामक शङ्ख बजाया ॥ १… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का द्वारका-गमन शौनकजी ने पूछा — धार्मिक-शिरोमणि महाराज युधिष्ठिर ने अपनी पैतृक सम्पत्ति को हड़प जाने के इच्छुक आततायियों का नाश करके अपने भाइयों के साथ किस प्रकार से राज्य-शासन किया और कौन-कौन-से काम… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय युधिष्ठिरादि का भीष्मजी के पास जाना और भगवान् श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए भीष्मजी का प्राणत्याग करना सूतजी कहते हैं — इस प्रकार राजा युधिष्ठिर प्रजाद्रोह से भयभीत हो गये । फिर सब धर्मों का… Read More