श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ January 19, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ सूतजी कहते हैं — मुनिवर ! उस समय अपने भक्तों के चित्त में अलौकिक भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ देख भक्तवत्सल श्रीभगवान् अपना धाम छोड़कर वहाँ पधारे ॥ १ ॥ उनके गले में वनमाला शोभा पा रही थी, श्रीअङ्ग सजल जलधर के… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ January 19, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् भक्ति के कष्ट की निवृत्ति नारदजी कहते हैं — अब मैं भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को स्थापित करने के लिये प्रयत्नपूर्वक श्रीशुकदेवजी के कहे हुए भागवतशास्त्र को कथा द्वारा उज्ज्वल ज्ञानयज्ञ करूँगा ॥ १ ॥ यह यज्ञ मुझे कहाँ करना चाहिये, आप इसके… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ January 19, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् भक्ति को दुःख दूर करने के लिये नारदजी का उद्योग नारदजी ने कहा — बाले ! तुम व्यर्थ ही अपने को क्यों खेद में डाल रही हो ? अरे ! तुम इतनी चिन्तातुर क्यों हो ? भगवान् श्रीकृष्ण के चरणकमलों का चिन्तन करो,… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय १ January 19, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय १ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीमद्भागवतमाहात्म्य देवर्षि नारद की भक्ति से भेंट (अनुष्टुप्) सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे । तापत्रविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः ॥ १ ॥ सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् श्रीकृष्ण को हम नमस्कार करते हैं, जो जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों प्रकार के तापों… Read More
श्रीमद्भागवत-सप्ताह की आवश्यक विधि January 19, 2019 | aspundir | 1 Comment श्रीमद्भागवत-सप्ताह की आवश्यक विधि 1. श्रीमद्भागवत-माहात्म्य 2. श्रीमद्भागवत – श्रीशुकदेवजी को नमस्कार 3. श्रीमद्भागवत की पूजनविधि 4. श्रीमद्भागवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान पुराण में श्रीमद्भागवत के सप्ताहपारायण तथा श्रवण की बड़ी भारी महिमा बतलायी गयी है, अतः यहाँ श्रीमद्भागवत-प्रेमियों के लिये संक्षेप में सप्ताह-यज्ञ की आवश्यक विधि का दिग्दर्शन कराया जाता है ।… Read More
देवी-देवताओं के गायत्री मन्त्र January 18, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ देवी-देवताओं के गायत्री मन्त्र ॥ सरस्वती गायत्री मन्त्रः- “ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥” षडङ्गन्यासः- ॐ ऐं वाग्देव्यै हृदयाय नमः ॥ १ ॥ ॐ विद्महे शिरसे स्वाहा ॥२॥ ॐ कामराजाय शिखायै वषट् ॥ ३ ॥ ॐ धीमहि कवचाय हुम् ॥ ४ ॥ ॐ तन्नो देवी नेत्र-त्रयाय वौषट् ॥ ५ ॥… Read More
श्रीमद्भागवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रार्थना वन्दे श्रीकृष्णदेवं मुरनरकभिदं वेदवेदान्तवेद्यं लोके भक्तिप्रसिद्धं यदुकुलजलधौ प्रादुरासीदपारे । यस्यासीद् रूपमेवं त्रिभुवनतरणे भक्तिवच्च स्वतन्त्रं शास्त्रं रूपं च लोके प्रकटयति मुदा यः स नो भूतिहेतुः ॥ जो इस जगत् में भक्ति से ही प्राप्त होते हैं, जिनका तत्त्व वेद और वेदान्त के द्वारा ही जाननेयोग्य है,… Read More
श्रीमद्भागवत की पूजनविधि January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रातःकाल स्नान के पश्चात् अपना नित्य-नियम समाप्त करके पहले भगवत्-सम्बन्धी स्तोत्रों एवं पदों के द्वारा मंगलाचरण और वन्दना करे । इसके बाद आचमन और प्राणायाम करके — ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैङ्गैस्तुष्टु वा ँ्सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ १ ॥ — इत्यादि मन्त्रों… Read More
श्रीमद्भागवत – श्रीशुकदेवजी को नमस्कार January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीशुकदेवजी को नमस्कार यं प्रव्रजन्तमनुपतमपेतकृत्यं द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव । पुत्रेति तन्मयतया तरवोऽभिनेदुस्तं सर्वभूतहृदयं मुनिमानतोऽस्मि ॥ (१ । २ । २) जिस समय श्रीशुकदेवजी का यज्ञोपवीत संस्कार भी नहीं हुआ था, सुतरां लौकिक-वैदिक कर्मों के अनुष्ठान का अवसर भी नहीं आया था, उन्हें अकेले ही संन्यास लेने के उद्देश्य से जाते देखकर उनके पिता व्यासजी विरह… Read More
श्रीमद्भागवत-माहात्म्य January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीमद्भागवत-माहात्म्य ॥ (स्वयं श्रीभगवान् के श्रीमुख से ब्रह्माजी के प्रति कथित) श्रीमद् भागवतं नाम पुराणं लोकविश्रुतम् । शृणुयाच्छ्रद्धया युक्तो मम सन्तोषकारणम् ॥ १ ॥ लोकविख्यात श्रीमद्भागवत नामक पुराण का प्रतिदिन श्रद्धा-युक्त होकर श्रवण करना चाहिये । यही मेरे संतोष का कारण है । नित्यं भागवतं यस्तु पुराणं पठते नरः । प्रत्यक्षरं भवेत्तस्य कपिलादानजं फलम्… Read More