भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २४ रम्भा-तृतीया व्रत का माहात्म्य भगवान् श्रीकृष्ण बोले — राजन ! अब मैं सभी पापों के नाशक, पुत्र एवं सौभाग्यप्रद सभी व्याधियों के उपशामक, पुण्य तथा सौख्य प्रदान करनेवाले रम्भा तृतीया व्रत का वर्णन करता हूँ ।… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २३ उमामहेश्वर—व्रत की विधि महाराज युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! जिस व्रत के करने से स्त्रियों को अनेक गुणवान पुत्र-पौत्र, सुवर्ण, वस्त्र और सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा पति-पत्नी का परस्पर वियोग नहीं होता, उस… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २२ अवियोग तृतीया व्रत राजा युधिष्ठिरने कहा — भगवन ! जिस व्रत के करने से पत्नी पति से वियुक्त न हो और अन्त में शिवलोक में निवास करे तथा जन्मान्तर में भी विधवा न हो ऐसे व्रत… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २१ ललितातृतीया –व्रत की विधि राजा युधिष्ठिर ने कहा — भगवन ! अब आप द्वादश मासों में किये जानेवाले व्रतों का वर्णन करें, जिनके करने से सभी उतम फल प्राप्त होते हैं, साथ ही प्रत्येक मास-व्रत का… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २० हरकाली व्रत कथा राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! भगवती हरकाली देवी कौन है ? इनका पूजन करने से स्त्रियों को क्या फल प्राप्त होता है ? इसका आप वर्णन करें ? भगवान् श्रीकृष्ण बोले… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८ से १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८ से १९ पञ्चाग्निसाधन नामक रुप-रम्भा-तृतीया तथा गोष्पद-तृतीया व्रत युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! इस मृत्युलोक में जिस व्रत के द्वारा स्त्रियों का गृहस्थाश्रम सुचारु-रूप से चले और उन्हे पति की भी प्रीति प्राप्त हो,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६ से १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६ से १७ मधूकतृतीया एवं मेघपाली तृतीया-व्रत युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! मधूक-वृक्ष का आश्रय ग्रहण करनेवाली भगवान् शंकर की भार्या भगवती गौरी की लक्ष्मी, सरस्वती आदि देवियों ने किस कारण से अर्चना की, इसे… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४ से १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४ से १५ यमद्वितीया तथा अशून्यशयन-व्रतकी विधि श्रीकृष्ण बोले — पार्थ ! श्रावण मास के शुक्ल पक्ष से आरम्भ कर चार मास की द्वितीया आदि अन्य भी तिथियाँ इस प्रकार की हैं, जिनके अनुष्ठान सुसम्पन्न… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३ जातिस्मर-भद्रव्रतका फल और विधान तथा स्वर्णष्ठीवी की कथा महाराज युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! अपने पूर्वजन्मों का ज्ञान होना बहुत कठिन है । आप यह बतायें कि ऋषियों के वरदान, देवताओं की आराधना या तीर्थ, स्नान,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२ बृहत्तपोव्रत का विधान और फल भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं सभी पापों का नाशक तथा सुर, असुर और मुनियों के लिये भी अत्यन्त दुर्लभ बृहत्तपोव्रत का विधान बतलाता हूँ, आप सुनें – आश्विन… Read More