भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११ कोकिलाव्रत का विधान और माहात्म्य राजा युधिष्ठिरने पूछा— भगवन् ! जिस व्रत के करने से कुलीन स्त्रियों का अपने पति के साथ परस्पर विशुद्ध प्रेम बना रहे, उसे आप बतलाइये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९ से १० January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९ से १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९ से १० अशोकव्रत तथा करवीरव्रत का माहात्म्य भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा को गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, सप्तधान्य से तथा फल, नारिकेल, अनार, लड्डू आदि अनेक प्रकार… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८ तिलकव्रत के माहात्म्य में चित्रलेखा का चरित्र (संवत्सर-प्रतिपदा का कृत्य) राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन ! ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गौरी, गणपति, दुर्गा, सोम, अग्नि तथा सूर्य आदि देवताओं के व्रत शास्त्रों में निर्दिष्ट हैं, उन… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७ व्रतोपवास की महिमा में शकटव्रत की कथा भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! मैंने जो भीषण नरकों का विस्तार से वर्णन किया है, उन्हें व्रत-उपवासरूपी नौका से मनुष्य पार कर सकता है । प्राणी को अति… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ५ से ६ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ५ से ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ५ से ६ विविध प्रकार के पापों एवं पुण्य-कर्मों का फल भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! अधम कर्म करने से जीव घोर नरक में गिरते हैं और अनेक प्रकार की यातनाएँ भोगते हैं… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ४ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ४ संसार के दोषों का वर्णन महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! यह जीव किस कर्म से देवता, मनुष्य और पशु आदि योनियों में उत्पन्न होता है ? बालभाव में कैसे पुष्ट होता है और किस… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३ नारदजी को विष्णु-माया का दर्शन राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन ! यह विष्णु-भगवान की माया किस प्रकार की है ? जो इस चराचर-जगत को व्यामोहित करती है । भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज !… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २ भुवनकोश का संक्षिप्त वर्णन महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! यह जगत् किसमें प्रतिष्ठित है ? कहाँ से उत्पन्न होता है ? इसका किसमें लय होता है ? इस विश्व का हेतु क्या हैं ?… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १ January 1, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १ महाराज युधिष्ठिर के पास व्यासादि महर्षियों का आगमन एवं उनसे उपदेश करने के लिये युधिष्ठिर की प्रार्थना कल्याणानि ददातु वो गणपतिर्यस्मिन्नतुष्टे सति क्षोदीयस्यपि कर्मणि प्रभवितुं ब्रह्मापि जिह्यायते । भेजे यश्चरणारविन्दमसकृत्सौभाग्यभाग्योदयै- स्तेनैषा जगति प्रसिद्धिमगमददेवेन्दलक्ष्मीरपि ॥ शश्वत्पूण्यहिरण्यगर्भरसनासिंहासनाध्यासिनी सेयं… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २६ December 31, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २६ व्यास जी बोले-पुराण पुरुष द्वारा उत्पन्न कल्कि देव दिव्यअश्व पर सुशोभित होकर खड्ग, चर्म के धारण पूर्वक उन दैत्यरूप म्लेच्छों का हनन करेंगे । तदुपरांत योग समाधिनिष्ठ होकर सोलह सहस्र वर्ष तक… Read More