परमभागवत परीक्षित् December 27, 2015 | aspundir | Leave a comment परमभागवत परीक्षित् जिस समय पाण्डव लोग सभी सुकृत कर्मों का अनुष्ठान करके आत्मा के आत्यन्तिक स्वरूप को जानकर, अपने मन को भगवान् के चरणाम्बुज में लगाकर एकान्त गति को प्राप्त हो गये, उस समय ब्राह्मणों की शिक्षासे महाभागवत राजा परीक्षित् पृथिवीका शासन करने लगे । राजा परीक्षित् ने जब सुना कि ‘कलिकाल के प्रभावसे प्राणियोंके… Read More
शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र December 27, 2015 | aspundir | Leave a comment शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र मन्त्र:- “बयरु न कर काहू सन कोई । राम प्रताप विषमता खोई ।।”… Read More
श्री सनकादि December 27, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री सनकादि सृष्टि के प्रारम्भ में लोकपितामह ब्रह्मा ने विविध लोकों को रचने की इच्छा से तपस्या की । स्रष्टा के उस अखण्ड तप से प्रसन्न होकर विश्वाधार प्रभु ने ‘तप’ अर्थवाले ‘सन’ नाम से युक्त होकर सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार-इन चार निवृत्ति-परायण ऊर्ध्वरेता मुनियों के रूपमें अवतार ग्रहण किया । ये प्रकट-काल से… Read More
रोग नाशक मन्त्र December 27, 2015 | aspundir | Leave a comment रोग नाशक मन्त्र मन्त्र:- “दैहिक दैविक भौतिक तापा । राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा ।।”… Read More
जय जगदम्बिके ! December 26, 2015 | aspundir | Leave a comment जय जगदम्बिके ! हो रही सुशोभित लिए खड्ग-गदा-चक्र-चाप, परिधान शूल भुशुण्डि और शंख भी सुघोष हैं । नील घनश्याम रंग नेत्र हैं विशाल तीन, अंग-अंग साज रहे छवि के सु-कोष हैं ।। भक्त-जन ध्यावें जिनके कोमल चरण दस, पावें सुत बित ज्ञान मोक्ष सौं सु-पोष हैं । ऐसी महा-काली गल मुण्ड-माल धारि, करें रक्षा हमारी… Read More
हरि भजन बिना सुख नाहीं रे December 26, 2015 | aspundir | Leave a comment हरि भजन बिना सुख नाहीं रे हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । नर क्यों बिरथा भटकाई रे ।। काशी गया द्वारका जावे, चार धाम तीरथ फिर आवे, मन की मैल न जाई रे । हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । छाप तिलक बहु भाँत लगाए, सिर पर जटा विभूत रमाए, हिरदे शांति न… Read More
विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र December 26, 2015 | aspundir | Leave a comment विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र मन्त्र:- “राजिव नयन धरें धनुसायक । भगति बिपति भंजन सुखदायक ।।”… Read More
अपनी रक्षा के लिए मन्त्र December 26, 2015 | aspundir | Leave a comment अपनी रक्षा के लिए मन्त्र मन्त्र:- “ममाभिरक्षय रघुकुल नायक । धृतबरचाप रुचिकर सायक ।। मोरे हित हरि सम नहीं कोऊ । ऐहि अवसर सहाय सोइ होऊ ।।”… Read More
क्लेश-हरण-मर्यादा-रक्षक मन्त्र December 26, 2015 | aspundir | Leave a comment क्लेश-हरण-मर्यादा-रक्षक मन्त्र मन्त्र:- “हरन कठिन कलि कलुष कलेषु । महामोह निसि दलन दिनेसू ।।”… Read More
भक्त श्रीसीहाजी राठौड् December 25, 2015 | aspundir | Leave a comment भक्त श्रीसीहाजी राठौड् हथूंडी / पाली, मारवाड तेरहवीं शताब्दी का समय था । भारत के क्षितिजि पर संकट के बादल मंडरा रहे थे । मुसलमानों कं आतंक से देशवासी पीड़ित थे । भारत छोटे-छोटे हिन्दू राज्यों में बटा हुआ था, जो मुसलमान आक्रमणकारियों का सामना करने में असमर्थ थे । राजस्थान की दशा विशेष रूप… Read More