श्री गरुड़-पुराणोक्त रोग-नाशिनी श्री धन्वन्तरि व्रत-कथा प्रथम अध्याय सनकादिक मुनियों ने सूत जी से कहा – हे सूत महा-मुने ! आपने भगवान् धन्वन्तरि की पूजा-विधि का विस्तार-पूर्वक वर्णन किया, किन्तु इसे सुनने पर भी हमें तृप्ति नहीं हुई । अतः श्री धन्वन्तरि का माहात्म्य अधिक विस्तार से बताइए । मुनि-श्रेष्ठ सुत जी ने कहा –… Read More


भगवान् धन्वन्तरि अष्टोत्तर-शत-नामावली ॐ अमृत-वपुषे नमः ॐ धर्म-ध्वजाय नमः ॐ धरा-वल्लभाय नमः ॐ धीराय नमः ॐ धिषण-वन्द्याय नमः ॐ धार्मिकाय नमः ॐ धर्म-नियामकाय नमः… Read More


श्रीबगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ।। श्रीनारद उवाच ।। भगवन्, देव-देवेश ! सृष्टि-स्थिति-लयात्मकम् । शतमष्टोत्तरं नाम्नां, बगलाया वदाधुना ।।… Read More


बगलामुखी मन्त्र वृहत् उत्कीलन विधानम् इसको नित्य करने की आवश्यकता नहीं है, पर्वादि में या पुरश्चरण काल में अवश्य करना चाहिये । विनियोगः- ॐ अस्य श्री उत्कीलन मंत्रस्य सदाशिव ऋषिः, वृहत् गायत्री छंदः, सूचीमुख्यै देवता, ॐ ऐं क्लीं ह्लीं ह्लीं ऐं अं बीजाय, ब्रह्म-ग्रंथिं उत्कीलय शक्तिः, ॐ ब्लूं ह्लौं ह्लं ह्लीं ह्लां ॐ कीलकं, श्रीं… Read More


|| बगलामुखी मातृका || ॐ ह्ल्रीं श्रीं अं बगलामुख्यै नमः शिरसि । ॐ ह्ल्रीं श्रीं आं स्तम्भिन्यै नमः मुखे । ॐ ह्ल्रीं श्रीं इं जिभृण्यै नमः दक्षनेत्रे ।… Read More


ब्रह्मास्त्र उपसंहार विद्या यदि शत्रु भी बगला ब्रह्मास्त्र का ज्ञाता है, परप्रयोग भारी है तो यह कालरात्रि का मंत्र शीघ्र काम करता है, कृत्या व शत्रु शक्ति को सम्मोहित कर निष्प्राण कर शिथिल कर देता है ।… Read More


ब्रह्मास्त्र महा विद्या श्रीबगला स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीब्रह्मास्त्र-महा-विद्या-श्रीबगला-मुखी स्तोत्रस्य श्रीनारद ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री बगला-मुखी देवता, ‘ह्ल्रीं’ बीजं, ‘स्वाहा’ शक्तिः, ‘बगला-मुखि’ कीलकं, मम सन्निहिता-नामसन्निहितानां विरोधिनां दुष्टानां वाङ्मुख-गतीनां स्तम्भनार्थं श्रीमहा-माया-बगला मुखी-वर-प्रसाद सिद्धयर्थं पाठे विनियोगः ।… Read More


पीताम्बरा पञ्चास्त्र मंत्राः पीताम्बरा के पाँच विशेष उग्र मंत्र हैं, जो शत्रू समूह को नष्ट करने में समर्थ हैं । १॰ वडवामुखी, २॰ उल्कामुखी, ३॰ जातवेदमुखी, ४॰ ज्वालामुखी तथा ५॰ वृहद्भानुमुखी ।… Read More


बगलामुखी कवचम् (रुद्रयामले) ।। श्री भैरवी उवाच ।। श्रुत्वा च बगलापूजां स्तोत्रं चापि महेश्वर । इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं वद मे प्रभो ।। १ ।। वैरिनाशकरं दिव्यं सर्वाऽशुभविनाशनम् । शुभदं स्मरणात् पुण्यं त्राहि मां दुःखनाशन ।। २ ।।… Read More