ग्रह आदि बाधा, रोग-निवारक प्रयोग बगलामुखी मन्त्र प्रयोग संकल्पः- ॐ अद्यैतस्य…………………….अमुक-मासे अमुक-पक्षे अमुक वासरे अमुक-गोत्रोत्पन्नो अमुक-शर्माऽहं (वर्माऽहं, गुप्तोऽहं वा) मम स्व-शरीरस्य (मम अमुक-यजमानस्य शरीरस्य वा) सम्पूर्ण-रोग-समूह-वात्तिक-पैत्तिक-श्लैष्मिक-द्वन्द्वज-नाना-रोगा-दुष्ट-रोगा-जन्मज-पातकज-नाना-ग्रहोपग्रह-प्रयोग-ग्रह-प्रवेश-ग्रह-प्रयोग-ग्रहादि-शान्त्यर्थे सर्व-ग्रहोच्चाटनार्थे श्रीबगलामुखी-देवता-मन्त्रस्य अयुत-जप-तद्-दशांश-होम-तर्पण-मार्जनाय संकल्पमहं करिष्ये ।… Read More


श्रीबगला-प्रातः-स्मरण प्रातः स्मरामि मधु-पूर्ण-सुधा-समुद्रम्, तन्मध्य-दिव्य-मणिद्वीप-मनोहरं च । कल्पाटवीममित-रत्न-विभूष-कोटम्, श्रीमण्डपं विशद-शोभि हृदि स्फुरन्तम् ।। १… Read More


श्रीबगला-प्रातः-स्मरण प्रातः स्मरामि बगलां कमलायताक्षी- मिन्दु-प्रसन्न-वदनां परि-पीत-वर्णाम् । पाणि-द्वयेन दधतीं च शिलां गिरीन्द्रे, द्वेष्याञ्छवासन-गतां मद-मत्त-चित्ताम् ।। १… Read More


आकर्षण – वशीकरण शाबर मन्त्र १॰ मन्त्र – “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” विधिः- मुँह में दूध भरकर उक्त मन्त्र ७८६ बार पढ़ें । फिर वह दूध उगलकर किसी पदार्थ में मिलाकर जिस स्त्री को खिला-पिला दिया जाए, वह आजीवन वश में रहेगी ।… Read More


हनुमान ज्योतिष साधक स्नानादि के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर सर्वप्रथम पाँच बार “ॐ रां रामाय नमः” का जप करने के पश्चात् ग्यारह बार “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप करें । तदुपरान्त आँख बन्द कर अपनी मनोकामना मन में बोलते हुए  आँख बन्द करएक से सात तक में से कोई एक अंक मन में विचार… Read More


।। अथ श्री सप्तमुखी हनुमत् कवचम् ।। (अथर्णव-रहस्योक्त) विनियोगः- ॐ अस्य श्रीसप्तमुखिवीरहनुमत्कवच स्तोत्र-मन्त्रस्य नारद ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीसप्तमुखिकपिः परमात्मा देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिः, हूं कीलकम्, मम सर्वाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः । करन्यासः- ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः, ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः, ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः, ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः, ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः, ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां… Read More


।। अथ श्रीपञ्चमुखी-हनुमत्कवचम् ।। पञ्च-मुख-हनुमत्-कवच पाठान्तर के साथ एक बार पुनः प्रस्तुत है । ।। श्री गणेशाय नमः ।। ।। ईश्वर उवाच।। अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि श्रृणु सर्वाङ्ग-सुन्दरी । यत्कृतं देवदेवेशि ध्यानं हनुमतः परम् ।। १।। पञ्चवक्त्र महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम् । बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थ सिद्धिदम् ।। २।।… Read More


।। अथ श्रीपञ्चमुखी-हनुमत्कवचम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्चमुख-हनुमन्-कवच-स्तोत्र-मंत्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, अनुष्टुप छंदः, पञ्च-मुख-वीर-हनुमान् देवता, हनुमानिति बीजम्, वायु-पुत्र इति शक्तिः, अञ्जनीसुत इति कीलकम्, श्रीराम-दूत-हनुमत्-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More


शरत्-पूर्णिमाः ‘लक्ष्मी-इन्द्र-कुबेर-पूजन’ ‘आश्विन पूर्णिमा’ में “प्रदोष-लक्ष्मी-पूजन’ 1.  सायं-काल यथा-शक्ति पूजा-सामग्री को एकत्र कर पवित्र आसन पर बैठे। आचमन कर दाएँ हाथ में जल-अक्षत-पुष्प लेकर ‘संकल्प’ करे। यथा- ॐ अस्य रात्रौ आश्विन-मासे-शुक्ल-पक्षे पूर्णिमायां तिथौ अमुक-गोत्रस्य अमुक-शर्मा (वर्मा या दासः) मम सकल-दुःख-दारिद्र्य-निरास-पूर्वक लक्ष्मी-इन्द्र-कुबेर-पूजनं अहं करिष्यामि (करिष्ये)।… Read More


शनि-पीड़ा के लिए प्रभाव-पूर्ण उपासनाएँ १॰ शनिवार, अमावस्या आदि दिनों पर ‘शनि-मन्दिर’ में जाकर आक-पर्ण (मदार के पत्ते) एवं पुष्पों की माला मूर्ति पर चढ़ाएँ । एक या आधा चम्मच तेल भी चढ़ाएँ । अब मूर्ति के सामने बैठकर शान्त-चित्त से निम्न मन्त्र, मूर्ति के भ्रू-मध्य या दाहिनी आँख पर त्राटक-पूर्वक प्रेम-भाव से, ११ बार… Read More