पितृ-आकर्षण मन्त्र (कभी-कभी पितृ-पीड़ा से मनुष्य का जीवन दुःख-मय हो जाता है। निर्धारित कार्यों में बाधा, विफलता की प्राप्ति होती है। आकस्मिक दुर्घटनाएँ घटती है। पूरा कुटुम्ब दुःखी रहता है। ऐसी दशा में निम्नलिखित ‘प्रयोग’ करे। यह ‘प्रयोग’ निर्दोष है। पितृ-पीड़ा हो या न हो, सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट हो जाती है और सुख-शान्ति… Read More


पितृ-स्तोत्रम् रूचिरूवाच नमस्येऽहं पितृन् श्राद्धे ये वसन्त्यधिदेवताः । देवैरपि हि तर्प्यंते ये च श्राद्धैः स्वधोत्तरैः ।।1।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे ये तर्प्यन्ते महर्षिभिः । श्राद्धेर्मनोमयैर्भक्तया भुक्ति-मुक्तिमभीप्सुभिः ।।2।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे सिद्धाः संतर्पयन्ति यान् । श्राद्धेषु दिव्यैः सकलै रूपहारैरनुत्तमैः ।।3।।… Read More


पितृ-यज्ञः वार्षिक श्राद्ध हिन्दू धर्म-ग्रन्थों के अनुसार प्रत्येक गृहस्थ हिन्दू को पाँच यज्ञों को अवश्य करना चाहिए- १॰ ब्रह्म-यज्ञ – प्रतिदिन अध्ययन और अध्यापन करना ही ब्रह्म-यज्ञ है। २॰ पितृ-यज्ञ – ‘श्राद्ध’ और ‘तर्पण’ करना ही पितृ-यज्ञ है। ३॰ देव-यज्ञ – देवताओं की प्रसन्नता हेतु पूजन-हवन आदि करना। ४॰ भूत-यज्ञ – ‘बलि’ और ‘वैश्व देव’… Read More


स्वास्थ्य के लिये टोटके 1॰ सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती… Read More


ज्येष्ठा देवी (द्ररिद्रा देवी) का अवतरण सनत्कुमार-संहिता के कार्तिक माहात्म्य में भगवान सूर्य ने बताया है कि जब द्वापर के अन्त में देवता और दानवों ने भगवान विष्णु और राजा बलि आदि के साथ समुद्र-मन्थन किया तो उस समय मन्दराचल को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया। पाँच वर्षों तक मन्थन किया गया… Read More


माँ बगलामुखी हेम रुचिर पट पीत सरोवर, प्रकटित धन्य स्व-नाम । मन्त्र-मयी बगलामुखि वैष्णवि, शक्ति सबल बल-धाम ।। ऊपर गगन हकार धराधर, धरणी बीज ललाम । बिन्दु-मयी बगला पीठेश्वरि, ह्रींकारेश्वरि-धाम ।।… Read More


श्री बगला प्राकट्य शिव के सम्मुख पार्वती, धर कर बोली माथ । बगला की उत्पत्ति की, कथा सुनाओ नाथ ! ।। ।। शिव उवाच ।। कृत-युग के पहिले भुतल पर, वात-क्षोभ-हिन्दोल उठा । ध्रुव तारा हिल गया अचानक, जड़-चेतन भू डोल उठा ।। प्रकृति पुरातन की शाखा के, नखत नीड़-सम टूट गए । सूरज-चन्दा की… Read More


श्री पीताम्बरा जय जयति सुखदा, सिद्धिदा, सर्वार्थ-साधक शंकरी । स्वाहा, स्वधा, सिद्धा, शुभा, दुर्गा नमो सर्वेश्वरी ।। जय सृष्टि-स्थिति-कारिणी-संहारिणी साध्या सुखी । शरणागतोऽहं त्राहि माम् माँ ! त्राहि माम् बगलामुखी ।। १… Read More