श्रीबगला ध्यानावली पीत-पीत वसन प्रसार करैं देह-छवि, अंग-अंग भूषन, सु-पीत झरि लावै है । मुख-कान्ति पीत-पीत, तीनों नेत्र पीत-पीत, अंग-राग पीत-पीत शोभा सरसावै है ।। निज भीत भक्तन को, हीत देति दौरि आय, अपनी दया को, रुप प्रकट दिखावै है । बगला ! तिहार नाम जपत, स-भक्ति जौन, भुक्ति पावै मुक्ति पावै, पीता बन जावै… Read More


बगला दशक (प्रस्तुत ‘बगला-दशक’ स्तोत्र में पाँच मन्त्र बगला विद्या के सुख-साध्य और सु-शीघ्र फल-दायी हैं । इस मन्त्रों में एक बगला के ‘मन्दार’ मन्त्र नाम से प्रसिद्ध है । उक्त स्तोत्र में मन्त्र तो पाँच हैं, पर उनके विषय में मन्त्रोद्धार तथा फल-समेत दस पद्य होने के कारण ‘बगला-दशक’ नाम दिया है ।) सुवर्णाभरणां… Read More


आम्नाय भेद क्रम दीक्षा बगलामुखी आराधना क्रम-पूर्वक करने से लाभ मिलता है । क्रम भिन्न कर एकदम उच्च प्रयोगों को करने से बाधा व हानि होती है । पहले एकाक्षरी, चतुरक्षरी, अष्टाक्षरी मंत्र जप के बाद ३६ अक्षरात्मक मंत्र ग्रहण करना चाहिये । साथ में गणेश, वटुक, मृत्युंजय, दक्षिणकालिका, सौभाग्य-विद्या, हृदय, शताक्षर, बगलापञ्चास्त्र, कुल्लुका, ब्रह्मास्त्र… Read More


श्रीरुद्र गीता ।। चौपाई ।। सुनु मुनि यह तन – मन्दिर माहीं । दुइ विधी चेतन-रुप सदा ही ।। निर्विकल्प आतम यक रुपा । सदा एक – रस शान्त अनूपा ।। यक चैतन्योन्मुख वपु अहई । सो वह मिला दृश्य सन रहई ।। वास्तव मँह न भयो कछु कैसे । स्वप्न -सृष्टि पुनि जाग्रत जैसे… Read More


रक्षा-कारी मन्त्र सर्प से रक्षा हेतु मन्त्रः कहीं भी अचानक सर्प देखने पर निम्न-लिखित मन्त्र का उच्चारण करने से सर्प से रक्षा होती है। यदि पूरा श्लोक याद न हो, तो केवल “आस्तिक”- नाम उच्चारण करे। यदि घर में अचानक साँप निकलते हों, तो घर की दीवाल पर भी घी और सिन्दूर से यह श्लोक… Read More


प्रार्थना- तेरी पोर पै परयो रहूँ मेरी चित्त-वृत्ति निज चर्नन में राखो नित, दीजिए सु-भक्ति पाप-कर्म तैं डरयो रहूँ । होय कैं कृपाल मोह-जाल तैं निबेरो देवि ! पाय कैं विवेक-ज्ञान ध्यान से भरयो रहूँ ।।… Read More


महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहा-लक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः।… Read More


‘सिद्धांत शिरोमणि’ ग्रंथ के अनुसार चंद्रमा की ऊर्ध्व कक्षा में पितृलोक है जहां पितृ रहते हैं। आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) के कृष्ण पक्ष को हमारे हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के रूप में मनाया जाता है। इसे महालय और पितृ पक्ष भी कहते हैं। श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह,… Read More


रामकथा साहित्य का पर्यवेक्षण रामयुग के सम्बन्ध में जानकारी का आधिकारिक स्रोत यद्यपि “वाल्मीकि रामायण” है, तथापि रामकथा का वर्णन न केवल संस्कृत साहित्य, वरन् भारत की अन्य भाषाओं के साहित्य में भी हुआ है, साथ ही अन्य देशों में भी रामकथा का प्रचलन मिलता है ।… Read More


पवनपुत्र प्रश्नावली इच्छुक मनुष्य इस प्रश्नावली के माध्यम से अपने प्रश्न का फल जानना चाहे तो केवल “मंगलवार” या “शनिवार” के दिन ही इस प्रश्नावली का प्रयोग करें । प्रयोग से पूर्व श्रीहनुमानजी का स्मरण करते हुए निम्न दोहे का उच्चारण करें “विघ्न हरण मंगल करन, पूरन पुण्य प्रकाशि । नाम लेत हनुमंत को, सभी… Read More