॥श्रीहरि:॥ दत्तात्रेय वज्र कवच ॐ ॥श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्‌ ॥ श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेयाय नम: । ऋषय ऊचु: । कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षणां साधनं किमुदाह्रतम्‌ ॥ १ ॥ व्यास उवाच ।… Read More


भगवान राम की पूजा-अर्चना का मन्त्र  “अब नाथ करि करुना बिलोकहु देहु जो बर मागऊँ । जेहिं जोनि जन्मौं कर्म बस तहँ रामपद अनुरागऊँ ।।”… Read More


सूरदास और कन्या उस समय मुगल सम्राट् अकबर राज्य कर रहा था । उसके बहुत-सी हिंदू बेगमें भी थीं । उनमें से एक का नाम था “जोधाबाई” । एक दिन जोधाबाई नदी में नहाने गयी । वहाँ उसने देखा कि एक छोटी-सी सुकुमार लड़की पानी में डूब-सी रही है । उसको दया आ गयी ।… Read More


ब्रह्मणस्पती सूक्त [ऋषि – कण्व धौर । देवता – ब्रह्मणस्पति । छन्द बाहर्त प्रगाध(विषमा बृहती, समासतो बृहती)।] उत्तिष्ठ ब्रह्मणस्पते देवयन्तस्त्वेमहे । उप प्र यन्तु मरुतः सुदानव इन्द्र प्राशूर्भवा सचा ॥१॥ हे ब्रह्मणस्पते! आप उठें, देवो की कामना करने वाले हम आपकी स्तुति करते है। कल्याणकारी मरुद्‍गण हमारे पास आयें। हे इन्द्रदेव। आप ब्रह्मणस्पति के साथ… Read More


सफलता पाने का मन्त्र  “प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देव । सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब ।।”… Read More


स्वस्ति-वाचन सभी शुभ एवं मांगलिक धार्मिक कार्यों को प्रारम्भ करने से पूर्व वेद के कुछ मन्त्रों का पाठ होता है, जो स्वस्ति-पाठ या स्वस्ति-वाचन कहलाता है । इस स्वस्ति-पाठ में ‘स्वस्ति’ शब्द आता है, इसलिये इस सूक्त का पाठ कल्याण करनेवाला है । ऋग्वेद प्रथम मण्डल का यह ८९वाँ सूक्त शुक्लयजुर्वेद वाजसनेयी-संहिता (२५/१४-२३), काण्व-संहिता, मैत्रायणी-संहिता… Read More


श्री त्रिपुर भैरवी कवचम् ।। श्रीपार्वत्युवाच ।। देव-देव महा-देव, सर्व-शास्त्र-विशारद ! कृपां कुरु जगन्नाथ ! धर्मज्ञोऽसि महा-मते ! । भैरवी या पुरा प्रोक्ता, विद्या त्रिपुर-पूर्विका । तस्यास्तु कवचं दिव्यं, मह्यं कफय तत्त्वतः । तस्यास्तु वचनं श्रुत्वा, जगाद् जगदीश्वरः । अद्भुतं कवचं देव्या, भैरव्या दिव्य-रुपि वै । ।। ईश्वर उवाच ।।… Read More