श्रीचण्डी-ध्वज स्तोत्रम् July 21, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीचण्डी-ध्वज स्तोत्रम् विनियोगः- अस्य श्री चण्डी-ध्वज स्तोत्र मन्त्रस्य मार्कण्डेय ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रां बीजं, श्रीं शक्तिः, श्रूं कीलकं मम वाञ्छितार्थ फल सिद्धयर्थे विनियोगः । अंगन्यासः- श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः से हृदयादिन्यास व करन्यास करें । ।। मूल-पाठ ।। ॐ श्रीं नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै भूत्त्यै नमो नमः । परमानन्दरुपिण्यै नित्यायै सततं नमः ।।… Read More
हिन्दू-धर्म का आधार July 21, 2015 | aspundir | Leave a comment हिन्दू-धर्म का आधार हिन्दू धर्म व्यक्ति प्रवर्तित धर्म नहीं है। इसका आधार वेदादि धर्मग्रन्थ है, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। ये सब दो विभागों में विभक्त है। 1॰ इस श्रेणी के ग्रन्थ “श्रुति´´ कहलाते हैं। ये अपौरषेय माने जाते हैं। इसमें वेद की चार संहिताओं, ब्राह्मणों, आरण्यकों, उपनिषदों, वेदांग, सूत्र आदि ग्रन्थों की गणना की… Read More
हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग ।। श्री पार्वत्युवाच ।। हनुमच्छावरं मन्त्रं, नित्य-नाथोदितं तथा । वद मे करुणा-सिन्धो ! सर्व-कर्म-फल-प्रदम् ।। ।। श्रीईश्वर उवाच ।। आञ्जनेयाख्यं मन्त्रं च, ह्यादि-नाथोदितं तथा । सर्व-प्रयोग-सिद्धिं च, तथाप्यत्यन्त-पावनम् ।। ।। मन्त्र ।। “ॐ ह्रीं यं ह्रीं राम-दूताय, रिपु-पुरी-दाहनाय अक्ष-कुक्षि-विदारणाय, अपरिमित-बल-पराक्रमाय, रावण-गिरि-वज्रायुधाय ह्रीं स्वाहा ।।” विधिः- ‘आञ्जनेय’ नामक उक्त मन्त्र का प्रयोग… Read More
गो-मय गणपति उपासना July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment गो-मय गणपति उपासना ‘गो-मय गणपति उपासना’– २१ दिनों की अति-प्रभावी उपासना है। यह उपासना किसी भी मास की शुक्ल चतुर्थी या शुभ दिन से प्रारम्भ की जा सकती है। संकल्पः- ॐ तत्सत् अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्यि द्वितीय-प्रहरार्द्धे श्वेत-वराह-कल्पे जम्बू-द्वीपे भरत-खण्डे आर्यावर्त्त-देशे अमुक पुण्य-क्षेत्रे कलि-युगे कलि-प्रथम-चरणे ‘अमुक’-नाम संवत्सरे भाद्रपद-मासे शुक्ल-पक्षे चतुर्थी-तिथौ अमुक-वासरे अमुक-गोत्रोत्पन्नो अमुक नाम-शर्मा-वर्मा-दास गणपति-देवता -प्रीति-पूर्वक त्वरित… Read More
श्रीगणेशोपासनाः- शीघ्र विवाह हेतु July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशोपासनाः- शीघ्र विवाह हेतु (१) ‘संकष्टी-चतुर्थी’ को उपासना प्रारम्भ करे। स्नान आदि से निवृत्त होकर श्रीगणेश जी के सामने बैठे। तथा-शक्ति ‘पूजन’ करे। ‘पूजा’ में रक्त अक्षत्, रक्त पुष्प, शमी-पत्र तथा दूर्वा चढ़ाए। फिर, हृदय में ‘श्रीगणेश’ का ‘ध्यान’ करे- “श्वेताभं शशि-शेखरं त्रिनयनं श्वेताम्बरालंकृतं। श्रीवाणी-सहितं रमेश-वरदं पीयूष-मूर्ति प्रभुम्।। पीयूषं निज-बाहुभिश्चदधतं पाशांकुशौ मुद्-गरं। नागास्यं सततं सुरैश्च… Read More
श्रीगणेशोपासनाः-पुत्र-प्राप्ति हेतु July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशोपासनाः-पुत्र-प्राप्ति हेतु (१) श्रीसुधा-गणेश-साधनाः- यह एक निश्चित फल-प्रद साधना है। इसके लिए पहले दूर्वा (दूब) ले आए। दूर्वा तोड़ते समय निम्न मन्त्र पढ़ें- “दूर्वे अमृत-सम्पन्ने, शत-मूले शतांकुरे ! क्षमस्वोत्पाटनं देवि ! महद्दोषोऽत्र विद्यते।।” पूजन-सामग्री एकत्र करने के बाद स्वच्छ होकर भगवान् श्रीगणेश का यथा-शक्ति पूजन करे। पूजन के बाद निम्न-लिखित मन्त्र का जप करे। यथा-… Read More
भगवान् श्री गणेश की साधनाएँ July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवान् श्री गणेश की साधनाएँ (१) श्री सिद्ध-विनायक-व्रत ‘श्री सिद्ध-विनायक-व्रत’ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को करे। पहले निम्न-लिखित मन्त्र का १००० या अधिक ‘जप’ करे। यथा- “सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवन्ता हतः। सुकुमार कामरोदीस्तव ह्येषः स्यमन्तकः।।” फिर श्री गणेश जी का षोडशोपचार पूजन कर, २१ मोदकों का नैवेद्य रखे। तब २१ दूर्वा लेकर उन्हें गन्ध-युक्त करे और… Read More
श्रीऋद्धि-सिद्धि सहित श्रीगणेश-साधना July 18, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीऋद्धि-सिद्धि सहित श्रीगणेश-साधना ‘कलौ चण्डी-विनायकौ’– कलियुग में ‘चण्डी’ और ‘गणेश’ की साधना ही श्रेयस्कर है। सच पूछा जाए, तो विघ्न-विनाशक गणेश और सर्व-शक्ति-रुपा माँ भगवती चण्डी के बिना कोई उपासना पूर्ण हो ही नहीं सकती। ‘भगवान् गणेश’ सभी साधनाओं के मूल हैं, तो ‘चण्डी’ साधना को प्रवहमान करने वाली मूल शक्ति है। यहाँ भगवान् गणेश… Read More
सर्व-सिद्धि-प्रद श्रीगणेश-कवच July 18, 2015 | aspundir | Leave a comment सर्व-सिद्धि-प्रद श्रीगणेश-कवच भगवान् गणेश का ध्यान कर, मानसोपचारों से उनका पूजन करे। तब निम्न ‘कवच-स्तोत्र’ का पाठ करे॰॰॰॰॰ श्रृणु वक्ष्यामि कवचं, सर्व-सिद्धि-करं प्रिये ! पठित्वा धारयित्वा च, मुच्यते सर्व-सङ्कटात्।। आमोदश्च शिरः पातु, प्रमोदश्च शिखोपरि। सम्मोदो भ्रू-युगे पातु, भ्रू-मध्ये तु गणाधिपः।। गण-क्रीडो नेत्र-युग्मे, नासायां गण-नायकः। गण-क्रीडान्वितः पातु, वदने सर्व-सिद्धये।। जिह्वायां सुमुखः पातु, ग्रीवायां दुर्मुखः सदा। विघ्नेशो… Read More
भगवान् गणेश बने ज्योतिषी July 18, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवान् गणेश बने ज्योतिषी ज्योतिषियों के परम आराध्य भगवान् गणेश ने भी एक बार ज्योतिषी का रुप धारण किया था । वैसे तो हम भगवान् गणेश के कई रुपों से परिचित हैं, लेकिन उनके ज्योतिषीय रुप को जानकर आश्चर्य होना सम्भव है । भगवान् गणेश ने यह रुप ब्रह्मा जी की सृष्टि संचालन में सहायता… Read More