अग्निपुराण – अध्याय 279 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनासीवाँ अध्याय [^1] सिद्ध ओषधियों का वर्णन सिद्धौषधानिः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आयुर्वेद का वर्णन करूँगा, जिसे भगवान् धन्वन्तरि ने सुश्रुत से कहा था। यह आयुर्वेद का सार है और अपने प्रयोगों द्वारा मृतक… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 278 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरुवंश का वर्णन पुरुवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! पूरु से जनमेजय हुए, जनमेजय से प्राचीवान् नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। प्राचीवान् से मनस्यु और मनस्यु से राजा वीतमय का जन्म हुआ। वीतमय से शुन्धु हुआ, शुन्धु… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 277 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय तुर्वसु आदि राजाओं के वंश का तथा अङ्गवंश का वर्णन राजवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! तुर्वसु के पुत्र वर्ग और वर्ग के पुत्र गोभानु हुए। गोभानु से त्रैशानि, त्रैशानि से करंधम और करंधम से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 276 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छिहत्तरवाँ अध्याय श्री कृष्ण की पत्नियों तथा पुत्रों के संक्षेप से नामनिर्देश तथा द्वादश-संग्रामों का संक्षिप्त परिचय द्वादशसङ्ग्रामाः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ महर्षि कश्यप वसुदेव के रूप में अवतीर्ण हुए थे और नारियों में श्रेष्ठ अदिति का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 275 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचहत्तरवाँ अध्याय यदुवंश का वर्णन यदुवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ । यदु के पाँच पुत्र थे — नीलाञ्जिक, रघु, क्रोष्टु, शतजित् और सहस्रजित्। इनमें सहस्रजित् सबसे ज्येष्ठ थे। शतजित् के हैहय, रेणुहय और हय — ये तीन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 274 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौहत्तरवाँ अध्याय सोमवंश का वर्णन सोमवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं सोमवंश का वर्णन करूँगा, इसका पाठ करने से पाप का नाश होता है। विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए। ब्रह्मा के पुत्र महर्षि अत्रि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 273 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिहत्तरवाँ अध्याय सूर्यवंश का वर्णन सूर्य्यवंशकीर्त्तनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं तुमसे सूर्यवंश तथा राजाओं के वंश का वर्णन करता हूँ। भगवान् विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा जी प्रकट हुए हैं। ब्रह्माजी के पुत्र का नाम… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 272 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बहत्तरवाँ अध्याय विभिन्न पुराणों के दान तथा महाभारत-श्रवण में दान-पूजन आदि का माहात्म्य दानादिमाहात्म्यम् पुष्कर कहते हैं — परशुराम। पूर्वकाल में लोकपितामह ब्रह्मा ने मरीचि के सम्मुख जिस का वर्णन किया था, पचीस हजार श्लोकों से समन्वित उस… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 271 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ एकहत्तरवाँ अध्याय वेदों के मन्त्र और शाखा आदि का वर्णन तथा वेदों की महिमा वेद शाखादिकीर्तनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम! वेदमन्त्र सम्पूर्ण विश्वपर अनुग्रह करने वाले तथा चारों पुरुषार्थों के साधक हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 270 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तरवाँ अध्याय विष्णु पञ्जर स्तोत्र का कथन विष्णु पञ्जरम् पुष्कर कहते हैं — द्विजश्रेष्ठ परशु राम। पूर्वकाल में भगवान् ब्रह्मा ने त्रिपुर संहार के लिये उद्यत शंकर की रक्षा के लिये ‘विष्णुपञ्जर’ नामक स्तोत्र का उपदेश किया था।… Read More