अग्निपुराण – अध्याय 259 July 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 259 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनसठवाँ अध्याय ऋग्विधान-विविध कामनाओं की सिद्धि के लिये प्रयुक्त होने वाले ऋग्वेदीय मन्त्रों का निर्देश ऋग्विधानं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं महर्षि पुष्कर के द्वारा परशुरामजी के प्रति वर्णित ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का विधान… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 258 July 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 258 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अट्ठावनवाँ अध्याय व्यवहार के वाक्पारुष्य, दण्डपारुष्य, साहस, विक्रियासम्प्रदान, सम्भूय-समुत्थान, स्तेय, स्त्री-संग्रहण तथा प्रकीर्णक- इन विवादास्पद विषयों पर विचार वाक्पारुष्यादिप्रकरणं वाक्पारुष्य [अब ‘वाक्पारुष्य’ (कठोर गाली देने आदि) के विषय में विचार किया जाता है। इसका लक्षण नारदजी ने इस… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 257 July 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 257 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तावनवाँ अध्याय सीमा-विवाद, स्वामिपाल विवाद, अस्वामिविक्रय, दत्ताप्रदानिक, क्रीतानुशय, अभ्युपेत्याशुश्रूषा, संविद्व्यतिक्रम, वेतनादान तथा द्यूतसमाह्वय का विचार सीमाविवादादिनिर्णयः सीमा-विवाद अग्निदेव कहते हैं — दो गाँवों से सम्बन्ध रखने वाले खेत की सीमा के विषय में विवाद उपस्थित होने पर तथा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 256 July 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 256 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छप्पनवाँ अध्याय पैतृक धन के अधिकारी; पत्नियों का धनाधिकार; पितामह के धन के अधिकारी; विभाज्य और अविभाज्य धन; वर्ण क्रम से पुत्रों के धनाधिकार; बारह प्रकार के पुत्र और उनके अधिकार पत्नी पुत्री आदि के, संसृष्टी के धन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 255 July 8, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 255 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचपनवाँ अध्याय साक्षी, लेखा तथा दिव्यप्रमाणों के विषय में विवेचन दिव्यानि प्रमाणानि ‘साक्षी-प्रकरण’ अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ। तपस्वी, कुलीन, दानशील, सत्यवादी, कोमल हृदय, धर्मात्मा, पुत्रयुक्त, धनी, पञ्चयज्ञ आदि वैदिक क्रियाओं से युक्त अपनी जाति और वर्ग के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 254 July 8, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 254 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौवनवाँ अध्याय ऋणादान तथा उपनिधि सम्बन्धी विचार व्यवहारः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! यदि ऋण लेने वाले पुरुष के अनेक ऋणदाता साहु हों और वे सब के-सब एक ही जाति के हों तो राजा उन्हें ग्रहणक्रम के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 253 July 8, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 253 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिरपनवाँ अध्याय व्यवहारशास्त्र तथा विविध व्यवहारों का वर्णन व्यवहारः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं व्यवहार का वर्णन करता हूँ, जो नय और अनय का विवेक प्रदान करने वाला है। उसके चार चरण, चार स्थान और चार… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 252 July 8, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 252 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बावनवाँ अध्याय तलवार के बत्तीस हाथ, पाश, चक्र, शूल, तोमर, गदा, परशु, मुद्गर, भिन्दिपाल, वज्र, कृपाण, क्षेपणी, गदायुद्ध तथा मल्लयुद्धके दाँव और पैंतरों का वर्णन धनुर्वेदकथनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् । भ्रान्त, उद्घान्त,आविद्ध, आप्लुत, विप्लुत, प्लुत (या… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 251 July 8, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 251 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इक्यावनवाँ अध्याय पाश के निर्माण और प्रयोग की विधि तथा तलवार और लाठी को अपने पास रखने एवं शत्रु पर चलाने की उपयुक्त पद्धति का निर्देश धनुर्वेदकथनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! जिसने हाथ, मन और दृष्टि… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 250 July 7, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 250 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचासवाँ अध्याय लक्ष्यवेध के लिये धनुष-बाण लेने और उनके समुचित प्रयोग करने की शिक्षा तथा वेध्य के विविध भेदों का वर्णन धनुर्वेदकथनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! द्विज को चाहिये कि पूरी लम्बाईवाले धनुष का निर्माण कराकर,… Read More