अग्निपुराण – अध्याय 099 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ निन्यानबेवाँ अध्याय सूर्यदेव की स्थापना की विधि सूर्यप्रतिष्ठाकथनं भगवान् शिव बोले — स्कन्द ! अब मैं सूर्यदेव की प्रतिष्ठा का वर्णन करूंगा। पूर्ववत् मण्डप-निर्माण और स्नान आदि कार्य का सम्पादन करके, पूर्वोक्त विधि से विद्या तथा साङ्ग सूर्यदेव का आसन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 098 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अट्ठानबेवाँ अध्याय गौरी प्रतिष्ठा की विधि गौरीप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं पूजासहित गौरी की प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा, सुनो। पूर्ववत् मण्डप आदि की रचना करके देवी की स्थापना एवं शय्याधिवासन करे। पूर्वोक्त मन्त्रों और मूर्त्यादिकों… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 097 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्तानबेवाँ अध्याय शिव प्रतिष्ठा की विधि शिवप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! प्रातः काल नित्य कर्म के अनन्तर द्वार देवताओं का पूजन करके मण्डप में प्रवेश करे। पूर्वोक्त विधि से देहशुद्धि आदि का अनुष्ठान करे। दिक्पालों का शिव-… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 096 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छियानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा में अधिवास की विधि अधिवासनविधिः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! पुरोहित को चाहिये कि वह स्नान करके प्रातः काल और मध्याह्नकाल, दोनों समय का नित्यकर्म सम्पन्न करके मूर्तिरक्षक सहायक ब्राह्मणों के साथ यज्ञमण्डप को पधारे।(मूर्तिभिर्जापिभिर्विप्रैः… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 095 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पंचानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा सामग्री की विधि प्रतिष्ठासामग्रीविधानम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं मन्दिर में लिङ्ग स्थापना की विधि का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष को देने वाली है। यदि मुक्ति के लिये लिङ्ग प्रतिष्ठा करनी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 094 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौरानबेवाँ अध्याय शिलान्यास की विधि शिलाविन्यासविधानम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! ईशान आदि कोणों में वास्तुमण्डल के बाहर पूर्ववत् चर की आदि का पूजन करे। प्रत्येक देवता के लिये क्रमशः तीन-तीन आहुतियाँ दे । भूतबलि देकर नियत लग्न… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 093 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरानबेवाँ अध्याय वास्तु पूजा विधि वास्तुपूजादिविधानम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर प्रासाद को आसूत्रित करके वास्तुमण्डल की रचना करे । समतल चौकोर क्षेत्र में चौंसठ कोष्ठ बनावे। कोनों में दो वंशों का विन्यास करे। विकोणगामिनी आठ रज्जुएँ… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 092 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा के अङ्गभूत शिलान्यास की विधि का वर्णन प्रतिष्ठाविधिकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं संक्षेप से और क्रमशः प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा । पीठ शक्ति है और लिङ्ग शिव। इन दोनों (पीठ और लिङ्ग… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 091 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यानबेवाँ अध्याय देवार्चन की महिमा तथा विविध मन्त्र एवं मण्डल का कथन विविधमन्त्रादिकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अभिषेक हो जाने पर दीक्षित पुरुष शिव, विष्णु तथा सूर्य आदि देवताओं का पूजन करे। जो शङ्ख, भेरी आदि वाद्यों… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 090 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ नब्बेवाँ अध्याय अभिषेक आदि की विधि का वर्णन अभिषेकादिकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द! शिव का पूजन करके गुरु शिष्य आदि का अभिषेक करे । इससे शिष्य को श्री की प्राप्ति होती है। ईशान आदि आठ दिशाओं में आठ… Read More