अग्निपुराण – अध्याय 109 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नौवाँ अध्याय तीर्थ माहात्म्य तीर्थमाहात्म्यम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सब तीर्थों का माहात्म्य बताऊँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है। जिसके हाथ, पैर और मन भली-भाँति संयम में रहें तथा जिसमें विद्या, तपस्या और… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 108 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ आठवाँ अध्याय भुवनकोश-वर्णन के प्रसंग में भूमण्डल के द्वीप आदि का परिचय भुवनकोषः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! जम्बू, प्लक्ष, महान् शाल्मलि, कुश, क्रौञ्च, शाक और सातवाँ पुष्कर — ये सातों द्वीप चारों ओर से खारे जल, इक्षुरस,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 107 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सातवाँ अध्याय भुवनकोष (पृथ्वी-द्वीप आदि) -का तथा स्वायम्भुव सर्ग का वर्णन स्वायम्भुवसर्गः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भुवनकोष तथा पृथ्वी एवं द्वीप आदि के लक्षणों का वर्णन करूँगा । आग्नीध्र, अग्निबाहु, वपुष्मान्, द्युतिमान्, मेधा, मेधातिथि,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 106 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छठा अध्याय नगर आदि वास्तु का वर्णन नगरादिवास्तुः भगवान् महेश्वर कहते हैं — कार्तिकेय ! अब मैं राज्यादि की अभिवृद्धि के लिये नगर–वास्तु का वर्णन करता हूँ। नगर-निर्माण के लिये एक योजन या आधी योजन भूमि ग्रहण करे।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 105 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पाँचवाँ अध्याय नगर, गृह आदि की वास्तु-प्रतिष्ठा विधि गृहादिवास्तु भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! नगर, ग्राम तथा दुर्ग आदि में गृहों और प्रासादों की वृद्धि हो, इसकी सिद्धि के लिये इक्यासी पदों का वास्तुमण्डल बनाकर उसमें… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 104 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चारवाँ अध्याय मंदिर प्रासाद के लक्षण सामान्यप्रासादलक्षणं भगवान् शंकर कहते हैं — ध्वजा में मयूर का चिह्न धारण करनेवाले स्कन्द ! अब मैं प्रासाद – सामान्य का लक्षण कहता हूँ। चौकोर क्षेत्र के चार क्षेत्र के भाग करके… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 103 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तीनवाँ अध्याय शिवलिङ्ग आदि के जीर्णोद्धार की विधि जीर्णोद्धार विधि भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! जीर्ण आदि लिङ्गों के विधिवत् उद्धार का प्रकार बता रहा हूँ। जिसका चिह्न मिट गया हो, जो टूट-फूट गया हो, मैल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 102 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ दोवाँ अध्याय ध्वजारोपण की विधि ध्वजारोपणम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! देव- मन्दिर में शिखर, ध्वजदण्ड एवं ध्वज की प्रतिष्ठा जिस प्रकार बतायी गयी है, उसका तुमसे वर्णन करता हूँ। शिखर के आधे भाग में शूल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 101 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ एकवाँ अध्याय प्रासाद-प्रतिष्ठा की विधि प्रासादप्रतिष्ठाकथनम् भगवान शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं प्रासाद (मन्दिर) की स्थापना का वर्णन करता हूँ। उसमें चैतन्य का सम्बन्ध दिखा रहा हूँ। जहाँ मन्दिर के गुंबज की समाप्ति होती है,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 100 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सौवाँ अध्याय द्वार प्रतिष्ठा की विधि द्वारप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं द्वारगत प्रतिष्ठा की विधि का वर्णन करूँगा। द्वार के अङ्गभूत उपकरणों का कसैले जल आदि से संस्कार करके उन्हें शय्या पर रखे। द्वार के… Read More