अग्निपुराण – अध्याय 183 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरासीवाँ अध्याय अष्टमी तिथि के व्रत अष्टमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं अष्टमी को किये जाने वाले व्रतों का वर्णन करूँगा। उनमें पहला रोहिणी नक्षत्रयुक्त अष्टमी का व्रत है। भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की रोहिणी नक्षत्र… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 182 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बयासीवाँ अध्याय सप्तमी तिथि के व्रत सप्तमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं सप्तमी तिथि के व्रत कहूँगा । यह सबको भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला है। माघ मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि को (अष्टदल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 181 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इक्यासीवाँ अध्याय षष्ठी तिथि के व्रत षष्ठीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं षष्ठी सम्बन्धी व्रतों को कहता हूँ । कार्तिक के कृष्णपक्ष की षष्ठी को फलमात्र का भोजन करके कार्तिकेय के लिये अर्घ्यदान करना चाहिये। इससे मनुष्य… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 180 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अस्सीवाँ अध्याय पञ्चमी तिथि के व्रत पञ्चमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आरोग्य, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाले पञ्चमी-व्रत का वर्णन करता हूँ। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के शुक्लपक्ष की पञ्चमी को वासुकि, तक्षक,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 179 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनासीवाँ अध्याय चतुर्थी तिथि के व्रत चतुर्थीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं आपके सम्मुख भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले चतुर्थी-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ । माघ के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को उपवास करके गणेश का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 178 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय तृतीया तिथि के व्रत तृतीयाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं आपके सम्मुख तृतीया तिथि को किये जाने वाले व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं। ललितातृतीया को किये जाने… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 177 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सतहत्तरवाँ अध्याय द्वितीया तिथि के व्रत द्वितीयाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं द्वितीया के व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष आदि देनेवाले हैं। प्रत्येक मास की द्वितीया को फूल खाकर रहे और दोनों अश्विनीकुमार नामक… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 176 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छिहत्तरवाँअध्याय प्रतिपदा तिथि के व्रत प्रतिपद्व्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं आपसे प्रतिपद् आदि तिथियों के व्रतों का वर्णन करूँगा, जो सम्पूर्ण मनोरथों को देनेवाले हैं। कार्तिक, आश्विन और चैत्र मास में कृष्णपक्ष की प्रतिपद् ब्रह्माजी की… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 175 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय व्रत के विषय में अनेक ज्ञातव्य बातें व्रतपरिभाषा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी! अब मैं तिथि, वार, नक्षत्र, दिवस, मास, ऋतु वर्ष तथा सूर्य संक्रान्ति के अवसर पर होनेवाले स्त्री-पुरुष- सम्बन्धी व्रत आदि का क्रमशः वर्णन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 174 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय प्रायश्चित्तों का वर्णन प्रायश्चित्तानि अग्निदेव कहते हैं — देव मन्दिर के पूजन आदि का लोप करने पर प्रायश्चित्त करना चाहिये। पूजा का लोप करने पर एक सौ आठ बार जप करे और दुगुनी पूजा की व्यवस्था… Read More