अग्निपुराण – अध्याय 163 अग्निपुराण – अध्याय 163 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरसठवाँ अध्याय श्राद्धकल्प का वर्णन श्राद्धकल्पकथनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले श्राद्धकल्प का वर्णन करता हूँ, सावधान होकर श्रवण कीजिये । श्राद्धकर्ता पुरुष मन और इन्द्रियों को वश में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 162 अग्निपुराण – अध्याय 162 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बासठवाँ अध्याय धर्मशास्त्र का उपदेश धर्मशास्त्रकथनं पुष्कर कहते हैं — मनु, विष्णु, याज्ञवल्क्य, हारीत, अत्रि, यम, अङ्गिरा, वसिष्ठ, दक्ष, संवर्त, शातातप, पराशर, आपस्तम्ब, उशना, व्यास, कात्यायन, बृहस्पति, गौतम, शङ्ख और लिखित — इन सबने धर्म का जैसा उपदेश… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 161 अग्निपुराण – अध्याय 161 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इकसठवाँ अध्याय संन्यासी के धर्म यतिधर्मः पुष्कर कहते हैं — अब मैं ज्ञान और मोक्ष आदि का साक्षात्कार कराने वाले संन्यास धर्म का वर्णन करूँगा। आयु के चौथे भाग में पहुँचकर, सब प्रकार के सङ्ग से दूर हो… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 160 अग्निपुराण – अध्याय 160 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ साठवाँ अध्याय वानप्रस्थ आश्रम वानप्रस्थाश्रमः पुष्कर कहते हैं — अब मैं वानप्रस्थ और संन्यासियों के धर्म का जैसा वर्णन करता हूँ, सुनो। सिर पर जटा रखना, प्रतिदिन अग्निहोत्र करना, धरती पर सोना और मृगचर्म धारण करना, वन में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 159 अग्निपुराण – अध्याय 159 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनसठवाँ अध्याय असंस्कृत आदि की शुद्धि असंस्कृतादिशौचं पुष्कर कहते हैं — मृतक का दाह संस्कार हुआ हो या नहीं, यदि श्रीहरि का स्मरण किया जाय तो उससे उसको स्वर्ग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति हो सकती है। मृतक… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 158 अग्निपुराण – अध्याय 158 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अट्ठावनवाँ अध्याय गर्भस्त्राव आदि सम्बन्धी अशौच स्रावाद्याशौचं पुष्कर कहते हैं — अब मैं मनु आदि महर्षियों के मत के अनुसार गर्भस्राव जनित अशौच का वर्णन करूँगा। चौथे मास के स्राव तथा पाँचवें, छठे मास के गर्भपात तक यह… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 157 अग्निपुराण – अध्याय 157 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय मरणाशौच तथा पिण्डदान एवं दाह-संस्कारकालिक कर्तव्य का कथन शावाशौचादिः पुष्कर कहते हैं — अब मैं ‘प्रेतशुद्धि’ तथा ‘सूतिकाशुद्धि’ का वर्णन करूँगा। सपिण्डों में अर्थात् मूल पुरुष की सातवीं पीढ़ी तक की संतानों में मरणाशौच दस दिन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 156 अग्निपुराण – अध्याय 156 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छप्पनवाँ अध्याय द्रव्य-शुद्धि का वर्णन द्रव्यशुद्धिः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब द्रव्यों की शुद्धि बतलाऊँगा । मिट्टी का बर्तन पुनः पकाने से शुद्ध होता है। किंतु मल-मूत्र आदि से स्पर्श हो जाने पर वह पुन: पकाने… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 155 अग्निपुराण – अध्याय 155 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचपनवाँ अध्याय आचार का वर्णन आचारः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! प्रतिदिन प्रातः काल ब्राह्ममुहूर्त में उठकर श्रीविष्णु आदि देवताओं का स्मरण करे। दिन में उत्तर की ओर मुख करके मल-मूत्र का त्याग करना चाहिये, रात में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 154 अग्निपुराण – अध्याय 154 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौवनवाँ अध्याय विवाहविषयक बातें विवाहः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! ब्राह्मण अपनी कामना के अनुसार चारों वर्णों की कन्याओं से विवाह कर सकता है, क्षत्रिय तीन से, वैश्य दो से तथा शूद्र एक ही स्त्री से विवाह… Read More