अग्निपुराण – अध्याय 153 अग्निपुराण – अध्याय 153 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरपनवाँ अध्याय संस्कारों का वर्णन और ब्रह्मचारी के धर्म का वर्णन ब्रह्मचर्याश्रमधर्मः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब मैं आश्रमी पुरुषों के धर्म का वर्णन करूँगा; सुनो! यह भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है। स्त्रियों के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 152 अग्निपुराण – अध्याय 152 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बावनवाँ अध्याय गृहस्थ की जीविका का वर्णन गृहस्थवृत्तिः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! ब्राह्मण अपने शास्त्रोक्त कर्म से ही जीविका चलावे; क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र के धर्म से जीवन-निर्वाह न करे। आपत्तिकाल में क्षत्रिय और वैश्य की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 151 अग्निपुराण – अध्याय 151 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय वर्ण और आश्रम सामान्य धर्म, वर्णों तथा विलोमज जातियों के विशेष धर्म का वर्णन वर्णेतरधर्माः अग्निदेव कहते हैं — मनु आदि राजर्षि जिन धर्मो का अनुष्ठान करके भोग और मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं, उनका वरुण… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 150 अग्निपुराण – अध्याय 150 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचासवाँ अध्याय मन्वन्तरों का वर्णन मन्वन्तराणि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं मन्वन्तरों का वर्णन करूँगा। सबसे प्रथम स्वायम्भुव मनु हुए हैं। उनके आग्नीध्र आदि पुत्र थे। स्वायम्भुव मन्वन्तर में यम नामक देवता, और्व आदि सप्तर्षि तथा शतक्रतु… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 149 अग्निपुराण – अध्याय 149 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनचासवाँ अध्याय होम के प्रकार-भेद एवं विविध फलों का कथन लक्षकोटिहोमः भगवान् महेश्वर ने कहा — देवि ! होम से युद्ध में विजय, राज्यप्राप्ति और विघ्नों का विनाश होता है। पहले ‘कृच्छ्रव्रत’ करके देहशुद्धि करे । तदनन्तर सौ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 148 अग्निपुराण – अध्याय 148 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय संग्राम-विजयदायक सूर्य पूजन का वर्णन सङ्ग्रामविजयपूजा भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! (अब मैं संग्राम में विजय देनेवाले सूर्यदेव के पूजन की विधि बताता हूँ।) ‘ॐ डे ख ख्यां सूर्याय संग्रामविजयाय नमः ।’ यह मन्त्र… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 147 अग्निपुराण – अध्याय 147 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय गुह्यकुब्जिका, नवा त्वरिता तथा दूतियों के मन्त्र एवं न्यास-पूजन आदि का वर्णन त्वरितापूजादिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! (अब मैं गुह्य कुब्जिका, नवा त्वरिता, दूती तथा त्वरिता के गुह्याङ्ग एवं तत्त्वों का वर्णन करूँगा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 146 अग्निपुराण – अध्याय 146 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियालीसवाँ अध्याय त्रिखण्डी – मन्त्र का वर्णन, पीठस्थान पर पूजनीय शक्तियों तथा आठ अष्टक देवियों का कथन अष्टाष्टकदेव्यः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर से सम्बन्ध रखनेवाली त्रिखण्डी का वर्णन करूँगा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 145 अग्निपुराण – अध्याय 145 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पैंतालीसवाँ अध्याय मालिनी आदि नाना प्रकार के मन्त्र और उनके षोढा-न्यास मालिनीनानामन्त्राः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं छः प्रकार के न्यासपूर्वक नाना प्रकार के मन्त्रों का वर्णन करूँगा। ये छहों प्रकार के न्यास ‘शाम्भव’,… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 144 अग्निपुराण – अध्याय 144 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौंवालीसवाँ अध्याय कुब्जिका की पूजा-विधि का वर्णन कुब्जिकापूजा भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं धर्म, अर्थ, काम तथा विजय प्रदान करने वाली श्रीमती कुब्जिकादेवी के मन्त्र का वर्णन करूंगा। परिवारसहित मूलमन्त्र से उनकी पूजा करनी… Read More