अग्निपुराण – अध्याय 203 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तीनवाँ अध्याय नरकों का वर्णन नरकस्वरूपम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नरकों का वर्णन करता हूँ। भगवान् श्रीविष्णु का पुष्पादि उपचारों से पूजन करनेवाले नरक को नहीं प्राप्त होते। आयु के समाप्त होने पर मनुष्य… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 202 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ दोवाँ अध्याय देवपूजा के योग्य और अयोग्य पुष्प पुष्पाध्यायकथनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! भगवान् श्रीहरि पुष्प, गन्ध, धूप, दीप और नैवेद्य के समर्पण से ही प्रसन्न हो जाते हैं। मैं तुम्हारे सम्मुख देवताओं के योग्य एवं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 201 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ एकवाँ अध्याय नवव्यूहार्चन नवव्यूहार्चनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं नवव्यूहार्चन की विधि बताऊँगा, जिसका उपदेश भगवान् श्रीहरि ने नारदजी के प्रति किया था। पद्ममय मण्डल बीच में ‘अं’ बीज से युक्त वासुदेव की पूजा करे (यथा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 200 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौवाँ अध्याय दीपदान – व्रत की महिमा एवं विदर्भराजकुमारी ललिता का उपाख्यान दीपदानव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले ‘दीपदान व्रत ‘का वर्णन करता हूँ। जो मनुष्य देवमन्दिर अथवा ब्राह्मण के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 199 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ निन्यानबेवाँ अध्याय ऋतु, वर्ष, मास, संक्रान्ति आदि विभिन्न व्रतों का वर्णन नानाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आपके सम्मुख ऋतु सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ, जो भोग और मोक्ष को सुलभ करनेवाले हैं। जो… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 198 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अट्ठानबेवाँ अध्याय मास सम्बन्धी व्रत मासव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ! अब मैं मास व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं। आषाढ़ से प्रारम्भ होने वाले चातुर्मास्य में अभ्यङ्ग (मालिश और उबटन) – का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 197 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सत्तानबेवाँ अध्याय दिन-सम्बन्धी व्रत दिवसव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं दिवस-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। सबसे पहले ‘धेनुव्रत’ के विषय में बतलाता हूँ। जो मनुष्य विपुल स्वर्णराशि के साथ उभयमुखी गौ का दान करता… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 196 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियानबेवाँ अध्याय नक्षत्र सम्बन्धी व्रत नक्षत्रव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नक्षत्र-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। नक्षत्र विशेष में पूजन करने पर श्रीहरि अभीष्ट मनोरथ की पूर्ति करते हैं। सर्वप्रथम नक्षत्र – पुरुष श्रीहरि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 195 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय वार-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन वारव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले वार-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। जब रविवार को हस्त अथवा पुनर्वसु नक्षत्र का योग हो, तब पवित्र… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 194 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौरानबेवाँ अध्याय अशोकपूर्णिमा आदि व्रतों का वर्णन अशोकपूर्णिमादिव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं ‘अशोकपूर्णिमा के विषय में कहता हूँ। फाल्गुन के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को भगवान् वराह और भूदेवी का पूजन करे। एक वर्ष ऐसा करने से… Read More