अग्निपुराण – अध्याय 193 अग्निपुराण – अध्याय 193 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरानबेवाँ अध्याय शिवरात्रि व्रत शिवरात्रिव्रतम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले ‘शिवरात्रि व्रत’ का वर्णन करता हूँ; एकाग्रचित्त से उसका श्रवण करो। फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनुष्य कामनासहित उपवास… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 192 अग्निपुराण – अध्याय 192 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बानबेवाँ अध्याय चतुर्दशी-सम्बन्धी व्रत चतुर्दशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं चतुर्दशी तिथि को किये जानेवाले व्रत का वर्णन करूँगा। वह व्रत भोग और मोक्ष देनेवाला है। कार्तिक की चतुर्दशी को निराहार रहकर भगवान् शिव का… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 191 अग्निपुराण – अध्याय 191 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इक्यानबेवाँ अध्याय त्रयोदशी तिथि के व्रत त्रयोदशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं त्रयोदशी तिथि के व्रत कहता हूँ, जो सब कुछ देने वाले हैं। पहले मैं ‘अनङ्गत्रयोदशी’ के विषय में बतलाता हूँ। पूर्वकाल में अनङ्ग (कामदेव) –… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 190 अग्निपुराण – अध्याय 190 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नब्बेवाँ अध्याय अखण्डद्वादशी व्रत का वर्णन अखण्डद्वादशीव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं ‘अखण्डद्वादशी’-व्रत के विषय में कहता हूँ, जो समस्त व्रतों की सम्पूर्णता का सम्पादन करने वाली है। मार्गशीर्ष के शुक्लपक्ष की द्वादशी को उपवास करके भगवान्… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 189 अग्निपुराण – अध्याय 189 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नवासीवाँ अध्याय श्रवण-द्वादशी व्रत का वर्णन श्रवणद्वादशीव्रतम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं भाद्रपदमास के शुक्लपक्ष में किये जानेवाले ‘श्रवणद्वादशी’ व्रत के विषय में कहता हूँ। यह श्रवण नक्षत्र से संयुक्त होनेपर श्रेष्ठ मानी जाती है एवं उपवास… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 188 अग्निपुराण – अध्याय 188 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अठासीवाँ अध्याय द्वादशी तिथि के व्रत द्वादशीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं भोग एवं मोक्षप्रद द्वादशी सम्बन्धी व्रत कहता हूँ । द्वादशी तिथि को मनुष्य रात्रि को एक समय भोजन करे और किसी से कुछ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 187 अग्निपुराण – अध्याय 187 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सतासीवाँ अध्याय एकादशी तिथि के व्रत एकादशीव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले एकादशी व्रत का वर्णन करूँगा । व्रत करनेवाला दशमी को मांस और मैथुन का परित्याग कर दे एवं भजन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 186 अग्निपुराण – अध्याय 186 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियासीवाँ अध्याय दशमी तिथि के व्रत दशमीव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं दशमी सम्बन्धी व्रत के विषय में कहता हूँ, जो धर्म-कामादि की सिद्धि करनेवाला है। दशमी को एक समय भोजन करे और व्रत के समाप्त… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 185 अग्निपुराण – अध्याय 185 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचासीवाँ अध्याय नवमी तिथि के व्रत नवमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष आदि की सिद्धि प्रदान करनेवाले नवमी सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ। आश्विन के शुक्लपक्ष में ‘गौरी-नवमी का व्रत करके… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 184 अग्निपुराण – अध्याय 184 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौरासीवाँ अध्याय अष्टमी-सम्बन्धी विविध व्रत अष्टमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ! चैत्रमास के शुक्लपक्ष की अष्टमी को व्रत करे और उस दिन ब्रह्मा आदि देवताओं तथा मातृगणों का जप-पूजन करे। कृष्णपक्ष की अष्टमी को एक वर्ष… Read More