अग्निपुराण – अध्याय 213 अग्निपुराण – अध्याय 213 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तेरहवाँ अध्याय पृथ्वीदान तथा गोदान की महिमा पृथ्वीदानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं ‘पृथ्वीदान’ के विषय में कहता हूँ। ‘पृथ्वी’ तीन प्रकार की मानी गयी है। सौ करोड़ योजन विस्तार वाली सप्तद्वीपवती समुद्रों सहित जम्बूद्वीप… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 212 अग्निपुराण – अध्याय 212 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बारहवाँ अध्याय विविध काम्य-दान एवं मेरुदानों का वर्णन मेरुदानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आपके सम्मुख काम्य-दानों का वर्णन करता हूँ, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। प्रत्येक मास में प्रतिदिन पूजन करते… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 211 अग्निपुराण – अध्याय 211 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय नाना प्रकार के दानों का वर्णन नानादानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! जिसके पास दस गौएँ हों, वह एक गौ; जिसके पास सौ गौएँ हों, वह दस गौएँ; जिसके पास एक हजार गौएँ हों, वह सौ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 210 अग्निपुराण – अध्याय 210 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ दसवाँ अध्याय सोलह महादानों के नाम; दस मेरुदान, दस धेनुदान और विविध गोदानों का वर्णन महादानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं सभी प्रकार के दानों का वर्णन करता हूँ। सोलह महादान होते हैं। सर्वप्रथम तुलापुरुषदान, फिर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 209 अग्निपुराण – अध्याय 209 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नवाँ अध्याय धन के प्रकार; देश-काल और पात्र का विचार; पात्रभेद से दान के फल-भेद; द्रव्य-देवताओं तथा दान-विधि का कथन दानपरिभाषाकथनं अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले दानधर्मो का वर्णन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 208 अग्निपुराण – अध्याय 208 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ आठवाँ अध्याय व्रतदानसमुच्चय व्रतदानादिसमुच्चयः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं सामान्य व्रतों और दानों के विषय में संक्षेपपूर्वक कहता हूँ । प्रतिपदा आदि तिथियों, सूर्य आदि वारों, कृत्तिका आदि नक्षत्रों, विष्कुम्भ आदि योगों, मेष आदि राशियों और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 207 अग्निपुराण – अध्याय 207 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सातवाँ अध्याय कौमुद-व्रत कौमुदव्रतं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ‘कौमुद’- व्रत के विषय में कहता हूँ। इसे आश्विन के शुक्लपक्ष में आरम्भ करना चाहिये। व्रत करनेवाला एकादशी को उपवास करके एक मास पर्यन्त भगवान् श्रीहरि का… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 206 अग्निपुराण – अध्याय 206 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छठा अध्याय अगस्त्य के उद्देश्य से अर्घ्यदान एवं उनके पूजन का कथन अगस्त्यार्घ्यदानकथनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! महर्षि अगस्त्य साक्षात् भगवान् विष्णु के स्वरूप हैं। उनका पूजन करके मनुष्य श्रीहरि को प्राप्त कर लेता है। जब… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 205 अग्निपुराण – अध्याय 205 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पाँचवाँ अध्याय भीष्मपञ्चकव्रत भीष्मपञ्चकव्रतं अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सब कुछ देनेवाले व्रतराज ‘भीष्मपञ्चक’ के विषय में कहता हूँ। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी को यह व्रत ग्रहण करे। पाँच दिनों तक तीनों समय स्नान करके पाँच तिल… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 204 अग्निपुराण – अध्याय 204 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चारवाँ अध्याय मासोपवास-व्रत का वर्णन मासोपवासव्रतं अग्निदेव कहते हैं — मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ! अब मैं तुम्हारे सम्मुख सबसे उत्तम मासोपवास- व्रत का वर्णन करता हूँ। वैष्णव यज्ञ का अनुष्ठान करके, आचार्य की आज्ञा लेकर, कृच्छ्र आदि व्रतों से… Read More