अग्निपुराण – अध्याय 043 अग्निपुराण – अध्याय 043 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय मन्दिर के देवता की स्थापना और भूतशान्ति आदि का कथन का वर्णन प्रासाददेवतास्थापनम् भूतशान्त्यादिकथनम् हयग्रीवजी कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं मन्दिर में स्थापित करने योग्य देवताओं का वर्णन करूँगा, आप सुनें। पञ्चायतन मन्दिर में जो बीच… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 042 अग्निपुराण – अध्याय 042 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बयालीसवाँ अध्याय प्रासाद लक्षण वर्णन प्रासादलक्षणकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं सर्वसाधारण प्रासाद (देवालय) का वर्णन करता हूँ, सुनो। विद्वान् पुरुष को चाहिये कि जहाँ मन्दिर का निर्माण कराना हो, वहाँ के चौकोर क्षेत्र के सोलह… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 041 अग्निपुराण – अध्याय 041 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकतालीसवाँ अध्याय शिलान्यास की विधि शिलादिन्यासविधानम् भगवान् हयग्रीव बोले — अब मैं शिलान्यास स्वरूपा पाद-प्रतिष्ठा का वर्णन करूंगा। पहले मण्डप बनाना चाहिये; फिर उसमें चार कुण्ड बनावे। वे कुण्ड क्रमशः कुम्भन्यास[^1] , इष्टकान्यास[^2] , द्वार और खम्भे के शुभ आश्रय… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 040 अग्निपुराण – अध्याय 040 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चालीसवाँ अध्याय वास्तुमण्डलवर्ती देवताओं के स्थापन, पूजन, अर्घ्यदान तथा बलिदान आदि की विधि वास्तुमण्डलदेवतास्थापनपूजनार्घ्य-दानबलिदानादिविधानादिकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! पूर्वकाल में सम्पूर्ण भूत-प्राणियों के लिये भयंकर एक महाभूत था। देवताओं ने उसे भूमि में निहित कर दिया। उसी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 039 अग्निपुराण – अध्याय 039 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्तालीसवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की स्थापना के लिये भूपरिग्रह का विधान विष्ण्वादिदेवताप्रतिष्ठाने भूपरिग्रहविधानम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं विष्णु आदि देवताओं की प्रतिष्ठा के विषय में कहूँगा, ध्यान देकर सुनिये। इस विषय में मेरे द्वारा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 038 अग्निपुराण – अध्याय 038 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़तीसवाँ अध्याय देवालय निर्माण से प्राप्त होनेवाले फल आदि का वर्णन देवालयनिर्माणफलादि अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर वसिष्ठ ! भगवान् वासुदेव आदि विभिन्न देवताओं के निमित्त मन्दिर का निर्माण कराने से जिस फल आदि की प्राप्ति होती है, अब मैं… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 037 अग्निपुराण – अध्याय 037 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सैंतीसवाँ अध्याय संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये साधारण पवित्रारोपण की विधि का वर्णन संक्षेपतः सर्वदेवसाधारणः पवित्रारोपणविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुने! अब संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये पवित्रारोपण की विधि सुनो। पहले जो चिह्न कहे गये हैं, उन्हीं… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 036 अग्निपुराण – अध्याय 036 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छत्तीसवाँ अध्याय भगवान् विष्णु के लिये पवित्रारोपण की विधि विष्णुपवित्रारोपणविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुने! प्रात:काल स्नान आदि करके, द्वारपालों का पूजन करने के पश्चात् गुप्त स्थान में प्रवेश करके, पूर्वाधिवासित पवित्रक में से एक लेकर प्रसादरूप से धारण कर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 035 अग्निपुराण – अध्याय 035 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंतीसवाँ अध्याय पवित्राधिवासन विधि का वर्णन पवित्राधिवासनविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुनीश्वर ! सम्पाताहुति से पवित्राओं का सेचन करके उनका अधिवासन करना चाहिये। नृसिंह-मन्त्र का जप करके उन्हें अभिमन्त्रित करे और अस्त्रमन्त्र (अस्त्राय फट्) -से उन्हें सुरक्षित रखे। पवित्राओं में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 034 अग्निपुराण – अध्याय 034 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौंतीसवाँ अध्याय पवित्रारोपण के लिये पूजा-होमादि की विधि का वर्णन पवित्रकारोपणे पूजाहोमादिविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुनीश्वर ! निम्नाङ्कित मन्त्र का उच्चारण करते हुए साधक यागमण्डप में प्रवेश करे और सजावट से यज्ञ के स्थान की शोभा बढ़ावे (तथा निम्नाङ्कित… Read More