भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९४ अनन्तचतुर्दशी-व्रत-विधान भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — राजन् ! सम्पूर्ण पापों का नाशक, कल्याणकारक तथा सभी कामनाओं को पूर्ण करनेवाला अनन्त चतुर्दशी नामक एक व्रत है, जिसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को सम्पन्न किया… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९३ आग्नेयी शिवचतुर्दशी-व्रत के प्रसंग में महर्षि अङ्गिरा का आख्यान श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! चतुर्दशी तिथि अग्नि की परम प्रेयसी है, क्योंकि नष्ट होते हुए भी अग्नि देव में इसी दिन पुनः अग्नित्व प्राप्त किया था… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९१ से ९२ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९१ से ९२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९१ से ९२ पाली-व्रत… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९० अनङ्ग-त्रयोदशी-व्रत युधिष्ठिर ने पूछा — संसार से उद्धार करनेवाले स्वामिन् ! आप रूप एवं सौभाग्य प्रदान करनेवाला कोई व्रत बताये । भगवान् श्रीकृष्णा ने कहा — महाराज ! शरीर को क्लेश देनेवाले बहुत-से व्रतों के करने… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८९ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८९ धर्मराज का समाराधन-व्रत… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८७ से ८८ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८७ से ८८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८७ से ८८ अबाधक-व्रत एवं दौर्भाग्य-दौर्गन्ध्य नाशक (मन्दार-निम्बार्क) व्रत का माहात्म्य राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! जनशून्य घोर वन में, समुद्रतरण में, संग्राम में, चोर आदि के भय में व्याकुल मनुष्य किस देवता… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८६ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८६ मदन-द्वादशी-व्रत में मरुद्गणों का आख्यान युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! दिति (दैत्योंकी जननी)— ने जिस व्रत करने से उनचास मरुद्गणओं को पुत्र रूप में प्राप्त किया था, अब मैं आपसे उस मदनद्वादशी-व्रत के विषय में… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८५ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८५ विभूतिद्वादशी-व्रत में राजा पुष्पवाहन की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! अब मैं भगवान् विष्णु के विभूति द्वादशी नामक सर्वोत्तम व्रत का वर्णन कर रहा हूँ, जो सम्पूर्ण देवगणों द्वारा अभिवन्दित है । बुद्धिमान्… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८४ विशोकद्वादशी-व्रत और गुड-धेनु आदि दस धेनुऑ के दान की विधि तथा उसकी महिमा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! इस भूतल पर कौन ऐसा उपवास या व्रत है, जो मनुष्य के अभीष्ट वस्तुओं के वियोग से… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८३ धरणी-व्रत (अर्चावतार-व्रत) राजा युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! वेदों में यह कहा गया है कि विधिपूर्वक यज्ञ करने, बड़े-बड़े दान देने और कठिन परिश्रम करने से परमेश्वर की प्राप्ति होती हैं, किंतु कलियुग के प्राणी,… Read More