भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११९ से १२० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११९ से १२० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११९ से १२० नवोदित चन्द्र, गुरु एवं शुक्र को अर्घ्य देने की विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं नवोदित चन्द्रमा को अर्घ्य देने की विधि बता रहा हूँ । प्रतिमास शुक्ल पक्ष… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११८ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११८ महर्षि अगस्त्य की कथा और उनके अर्घ्य-दान की विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! अब आप सभी पापों को दूर करनेवाले अगस्त्य मुनि के चरित्र, अर्घ्यदान की विधि और अगस्त्योदय-काल का वर्णन कीजिये ।… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११७ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११७ भद्रा का चरित्र एवं उसके व्रत की विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! लोक में भद्रा विष्टि नाम से प्रसिद्ध है, वह कैसी है, कौन है, वह किसकी पुत्री है, उसका पूजन किस विधि… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११५ से ११६ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११५ से ११६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११५ से ११६ आदित्यवार नक्त-व्रत तथा संक्रान्ति- व्रत के उद्यापन की विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवान् गोविन्द ! आप कोई ऐसा व्रत बताइये, जो सम्पूर्ण पापों का नाश करनेवाला, आरोग्यदायक और अनन्त्त फलप्रद… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११४ शनैश्चर-व्रत के प्रसंग में महामुनि पिप्पलाद का आख्यान भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! एक बार त्रेतायुग में अनावृष्टि के कारण भयंकर दुर्भिक्ष पड़ गया । उस घोर अकाल में कौशिक मुनि अपनी स्त्री तथा… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११२ से ११३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११२ से ११३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११२ से ११३ वृन्ताक-त्याग एवं ग्रह-नक्षत्र व्रत की विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं वृन्ताक (बैगन)— के त्याग की विधि बता रहा हूँ । व्रती को चाहिये कि एक वर्ष, छः मास… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १११ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १११ कामदान-वेश्या (पण्यस्त्री) व्रत का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — कृष्ण ! वर्णाश्रम की उत्पत्ति तो मैंने पुराणों में सुन लिया । अब वेश्याओं का आचरण धर्म सविधान जानना चाहता हूँ । उनके दैवत कौन हैं, व्रत… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११० भग्न-व्रत की प्रायश्चित्त (सम्पूर्ण व्रत) -विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! यदि मनुष्य नक्षत्र-पुरुष-व्रत को ग्रहण कर उसे न कर सके तो किस कर्म के द्वारा वह चीर्ण (कृत) माना जाता है, इसे बतलायें… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १०८ से १०९ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १०८ से १०९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १०८ से १०९ वैष्णव एवं शैव नक्षत्र पुरुष-व्रतों का विधान राजा युधिष्ठिर ने पूछा — यदुसत्तम ! पुरुष और स्त्रियों को उत्तम रूप किस कर्म के करने से प्राप्त होता है ? आप सर्वाङ्गसुन्दर श्रेष्ठ… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १०७ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १०७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १०७ मास-नक्षत्र-व्रत के माहात्म्य में साम्भरायणी की कथा राजा युधिष्ठिर ने कहा — प्रभो ! ऐश्वर्य आदि के प्राप्त न होने से इतना कष्ट नहीं होता, जितना प्राप्त होकर नष्ट हो जाने से होता है । इसलिये… Read More