भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३९ कमलषष्ठी (फलषष्ठी-) व्रत [^1] भगवान् श्रीकृष्ण बोले — राजन् ! अब मैं कमलषष्ठी नामक व्रत को बतलाता हूँ, जिसमें उपवास करने से व्यक्ति पाप-मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है । मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३८ विशोक –षष्ठी – व्रत राजा युधिष्ठिर ने कहा — जनार्दन ! आपके श्रीमुख से पंचमी-व्रतों का विधान सुनकर बहुत प्रसन्नता हुई । अब आप षष्ठी व्रतों का विधान बतलाये । मैंने सुना हैं कि षष्ठी को… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३७ श्रीपंचमीव्रत कथा राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन ! तीनों लोकों में लक्ष्मी दुर्लभ हैं; पर व्रत, होम, तप, जप, नमस्कार आदि किस कर्म के करने से स्थिर लक्ष्मी प्राप्त होती है ? आप सब कुछ… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३६ नागपञ्चमी व्रत का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — राजन् ! पञ्चमी तिथि नागों के लिए अत्यन्त प्रिय है और इसी पञ्चमी तिथि में नागों का महान् उत्सव भी होता है । वासुकि, तक्षक, कालिय, मणिभद्र, धृतराष्ट्र, रैवत,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३५ सरस्वती व्रत (सारस्वत-व्रत) का विधान और फल राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! किस व्रत के करने से वाणी मधुर होती है ? प्राणी को सौभाग्य प्राप्त होता है ? विद्या में अतिकौशल प्राप्त होता… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३४ शान्तिव्रत का विधान और फल भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं पञ्चमी कल्प में शान्तिव्रत का वर्णन करता हूँ । इसके करने से गृहस्थो को सब प्रकार की शान्ति प्राप्त होती हैं । कार्तिक… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३३ विनायकचतुर्थी व्रत का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — राजन् ! मैं तुम्हें विघ्नविनाशक एक व्रत भी बता रहा हूँ, जिसे सविधान सुसम्पन्न करने पर कभी विघ्न नहीं होता है । राजेन्द्र ! फाल्गुन मास की शुक्ल चतुर्थी… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३२ विनायक-स्नपन-चतुर्थी व्रत का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — माधव ! मुझे यह जानने की इच्छा है कि उत्तम मनुष्यों द्वारा भी आरम्भ किये गये कर्म सफल न होकर अधूरे रह जाते हैं, इसका क्या कारण है,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३१ अङ्गारक चतुर्थी व्रत का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — यादव ! यदि आप मेरे ऊपर अधिक प्रसन्न हैं, तो व्रत बताने की कृपा कीजिये, जिस के अनुष्ठान द्वारा रूप सौभाग्य सुख की प्राप्ति पूर्वक जो स्त्री… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ३० अक्षय-तृतीया व्रत के प्रसंग में धर्म वणिक् का चरित्र भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब आप वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अक्षय-तृतीया की कथा सुने । इस दिन स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण… Read More