भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८ से १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८ से १९ पञ्चाग्निसाधन नामक रुप-रम्भा-तृतीया तथा गोष्पद-तृतीया व्रत युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! इस मृत्युलोक में जिस व्रत के द्वारा स्त्रियों का गृहस्थाश्रम सुचारु-रूप से चले और उन्हे पति की भी प्रीति प्राप्त हो,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६ से १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६ से १७ मधूकतृतीया एवं मेघपाली तृतीया-व्रत युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! मधूक-वृक्ष का आश्रय ग्रहण करनेवाली भगवान् शंकर की भार्या भगवती गौरी की लक्ष्मी, सरस्वती आदि देवियों ने किस कारण से अर्चना की, इसे… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४ से १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४ से १५ यमद्वितीया तथा अशून्यशयन-व्रतकी विधि श्रीकृष्ण बोले — पार्थ ! श्रावण मास के शुक्ल पक्ष से आरम्भ कर चार मास की द्वितीया आदि अन्य भी तिथियाँ इस प्रकार की हैं, जिनके अनुष्ठान सुसम्पन्न… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३ जातिस्मर-भद्रव्रतका फल और विधान तथा स्वर्णष्ठीवी की कथा महाराज युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! अपने पूर्वजन्मों का ज्ञान होना बहुत कठिन है । आप यह बतायें कि ऋषियों के वरदान, देवताओं की आराधना या तीर्थ, स्नान,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२ बृहत्तपोव्रत का विधान और फल भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं सभी पापों का नाशक तथा सुर, असुर और मुनियों के लिये भी अत्यन्त दुर्लभ बृहत्तपोव्रत का विधान बतलाता हूँ, आप सुनें – आश्विन… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११ कोकिलाव्रत का विधान और माहात्म्य राजा युधिष्ठिरने पूछा— भगवन् ! जिस व्रत के करने से कुलीन स्त्रियों का अपने पति के साथ परस्पर विशुद्ध प्रेम बना रहे, उसे आप बतलाइये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९ से १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९ से १० अशोकव्रत तथा करवीरव्रत का माहात्म्य भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा को गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, सप्तधान्य से तथा फल, नारिकेल, अनार, लड्डू आदि अनेक प्रकार… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८ तिलकव्रत के माहात्म्य में चित्रलेखा का चरित्र (संवत्सर-प्रतिपदा का कृत्य) राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन ! ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गौरी, गणपति, दुर्गा, सोम, अग्नि तथा सूर्य आदि देवताओं के व्रत शास्त्रों में निर्दिष्ट हैं, उन… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७ व्रतोपवास की महिमा में शकटव्रत की कथा भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! मैंने जो भीषण नरकों का विस्तार से वर्णन किया है, उन्हें व्रत-उपवासरूपी नौका से मनुष्य पार कर सकता है । प्राणी को अति… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ५ से ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ५ से ६ विविध प्रकार के पापों एवं पुण्य-कर्मों का फल भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! अधम कर्म करने से जीव घोर नरक में गिरते हैं और अनेक प्रकार की यातनाएँ भोगते हैं… Read More