दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ।। दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ।। ।। श्रीः ।। ।। श्री दुर्गायै नमः ।। ।। अथ श्री दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ।। नारद उवाच – कुमार गुणगम्भीर देवसेनापते प्रभो । सर्वाभीष्टप्रदं पुंसां सर्वपापप्रणाशनम् ।। १।। गुह्याद्गुह्यतरं स्तोत्रं भक्तिवर्धकमञ्जसा । मङ्गलं ग्रहपीडादिशान्तिदं वक्तुमर्हसि ।। २।। स्कन्द उवाच – … Read More
सार्द्ध नव-चण्डी प्रयोग सार्द्ध नव-चण्डी प्रयोग कर्म-फल का इच्छुक प्राणी स्व-अभिलषित वस्तुओं की प्राप्ति के लिए अत्यधिक व्यग्र मन से प्रयत्न करता है। जीवन का बहुत बडा भाग व्यग्र मन से की गई साधना में व्यतीत हो जाता है। तथापि, सिद्धि एवं शान्ति नहीं मिल पाती और व्यक्ति सन्तप्त-चित्त ही संसार से चला जाता है। इसके कारणों पर… Read More
देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् ।। देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् ।। ग्रीवायां मधू सूदनोऽस्य शिरसि श्री नीलकण्ठः स्थितः, श्री देवी गिरिजा ललाट फलके वक्षः स्थले शारदा । षड्वक्त्रो मणिबन्ध संधिषु तथा नागास्तु पार्श्वस्थिताः, कर्णौयस्य तु चाश्विनौ स भगवान-सिंहो ममास्त्विष्टदः ।।१… Read More
श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि [^1] पूजनकर्ता स्नान करके, आसन शुद्धि की क्रिया सम्पन्न करके, शुद्ध आसन पर बैठ जाएँ, साथ में शुद्ध जल, पूजन सामग्री और श्री-दुर्गा-सप्तशती की पुस्तक । इन्हें अपने सामने काष्ठ आदि के शुद्ध आसन पर विराजमान कर दें। माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें, शिखा बाँध… Read More
कुमारी पूजा कुमारी पूजा ‘कुमारी-पूजा’ से भगवती सद्यः प्रसन्न होती है। कुमारी-पूजा में जाति-भेद नहीं माना गया है। चारों वर्णों की कुमारियों की पूजा, जिनका फल भी भिन्न-भिन्न है, शास्त्र द्वारा निर्दिष्ट है। ‘मेरु-तन्त्र’ में लिखा है कि ‘ब्राह्मण-कुमारी’ के पूजन से सर्व-इष्ट, ‘क्षत्रिय-कुमारी’ के पूजन से यश, ‘वैश्य-कुमारी’ के पूजन से धन तथा ‘शूद्र-कुमारी’ के पूजन… Read More
शारदीय नव-रात्र में कलश-स्थापन शारदीय नव-रात्र में कलश-स्थापन चारों नव-रात्रों में “शारदीय-नव-रात्र’ का विशेष महत्त्व है। कहा भी है- शरत्-काले महा-पूजा, क्रियते या च वार्षिकी । तस्याह सकलां बाधां, नाशयिष्याम्यसंशयम् ।। ऐसी दशा में ‘शारदीय नव-रात्र’ के पूजा-विधान पर विशेष रुप से ध्यान देना आवश्यक है। भगवान् आशुतोष कथित अनेक तन्त्र-शास्त्र एवं स्मार्त-शास्त्र इस पूजा के उत्तमोत्तम विधि-विधान से… Read More
आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चन्डी-विधानम् ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ घटित चन्डी-विधानम् सम्पूर्ण कामनाओं की यथा-शीघ्र सिद्धि के लिए मैथिलों द्वारा कही हुई चण्डी-पाठ-घटित ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ के पाठ की विधि आचमन, प्राणायाम, संकल्प (देश-काल-निर्देश) के उपरान्त – ‘अमुक-प्रवरान्वित अमुक-गोत्रोत्पन्नामुक-शर्मणः अमुक-वेदान्तर्गत अमुक-शाखाध्यायी मम (यजमानस्य) शीघ्रं अमुक-दुस्तर-संकट-निवृत्त्यर्थं सप्तशती-माला-मन्त्रस्य क्रमेण प्रथमादि-त्रयोदशाध्यायान्ते क्रियमाण आपदुद्धारक-बटुक-भैरवाष्टोत्तर-शत-नाम-मात्रावर्तन-घटित-अमुक-संख्यकावर्तनमहं करिष्ये।’ उक्त प्रकार ‘संकल्प’ में योजना करे। इसके बाद पहले विघ्नों के निवारण के लिए… Read More
रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् विनियोगः- अस्य श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तोत्रस्य श्रीमहा-मार्तण्ड-भैरवः ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीपराऽम्बिका दुर्गा देवता, दुं बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकं, सर्वार्थ-साधने पाठे विनियोगः। ध्यान्- हेम-प्रख्यामिन्दु-खण्डात्त-मौलिं, शंखाभीष्टाभीति-हस्तां त्रिनेत्राम्। हेमाब्जस्थां पीत-वस्त्रां प्रसन्नां, देवीं दुर्गां दिव्य-रुपां नमामि ।।… Read More
दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भगवती पुर-पुर देशनि पुराधिपतये सर्व जगद-भयंकरिच्छीमै ॐ रांग र रीं क्ला वालो सल्पञ्च काम-बाण सर्वश्री समस्त नर-नारी-गणं मम वशमानय मानय स्वाहा ।”… Read More
नवदुर्गोपनिषत् नवदुर्गोपनिषत् उक्तं चाथर्वणरहस्ये । विनियोगः- ॐ अस्य श्रीनवदुर्गामहामन्त्रस्य किरातरुपधर ईश्वर ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, अन्तर्यामी नारायणः किरातरुप धरेश्वरो नवदुर्गागायत्री देवता, ॐ बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकं, मम धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे विनियोगः ।… Read More