शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 08 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय विश्वकर्मा द्वारा निर्मित सर्वदेवमय दिव्य रथ का वर्णन व्यासजी बोले — हे सनत्कुमार ! हे सर्वज्ञ ! हे शैवप्रवर ! हे सन्मते ! हे तात ! आपने परमेश्वर की यह अद्भुत कथा सुनायी । अब आप सर्वदेवमय परम दिव्य… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 07 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय भगवान् शिव की प्रसन्नता के लिये देवताओं द्वारा मन्त्रजप, शिव का प्राकट्य तथा त्रिपुर विनाश के लिये दिव्य रथ आदि के निर्माण के लिये विष्णुजी से कहना सनत्कुमार बोले — समस्त देवता आदि के इस वचन को सुनकर शरणागतों… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 06 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय त्रिपुरध्वंस के लिये देवताओं द्वारा भगवान् शिव की स्तुति व्यासजी बोले — हे सनत्कुमार ! हे विभो ! भाइयों तथा पुरवासियोंसहित उस दैत्यराज के मोहित हो जाने पर क्या हुआ, वह सारा वृत्तान्त कहिये ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 05 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय मायावी यति द्वारा अपने धर्म का उपदेश, त्रिपुरवासियों का उसे स्वीकार करना, वेदधर्म के नष्ट हो जाने से त्रिपुर में अधर्माचरण की प्रवृत्ति व्यासजी बोले — उस मायावी के द्वारा मोहित दैत्यराज के दीक्षित हो जाने पर उस मायावी… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 04 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय त्रिपुरवासी दैत्यों को मोहित करने के लिये भगवान् विष्णु द्वारा एक मुनिरूप पुरुष की उत्पत्ति, उसकी सहायता के लिये नारदजी का त्रिपुर में गमन, त्रिपुराधिप का दीक्षा ग्रहण करना सनत्कुमार बोले — उन महातेजस्वी विष्णु ने उनके धर्म में… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 03 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय त्रिपुर के विनाश के लिये देवताओं का विष्णु से निवेदन करना, विष्ण द्वारा त्रिपुर-विनाश के लिये यज्ञकुण्ड से भूतसमुदाय को प्रकट करना, त्रिपुर के भय से भूतों का पलायित होना, पुनः विष्णु द्वारा देवकार्य की सिद्धि के लिये उपाय… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 02 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय तारकपुत्रों से पीड़ित देवताओं का ब्रह्माजी के पास जाना और उनके परामर्श के अनुसार असुर-वध के लिये भगवान् शंकर की स्तुति करना व्यासजी बोले — हे ब्रह्मपुत्र ! हे महाप्राज्ञ ! हे वक्ताओं में श्रेष्ठ ! अब मुझे बताइये… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 01 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय तारकासुर के पुत्र तारकाक्ष, विद्युन्माली एवं कमलाक्ष की तपस्या से प्रसन्न ब्रह्मा द्वारा उन्हें वर की प्राप्ति, तीनों पुरों की शोभा का वर्णन नारदजी बोले — [हे ब्रह्मन्!] हमने गणेश तथा स्कन्द की सत्कथा से समन्वित गृहस्थ शिवजी के… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 20 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय प्रजापति विश्वरूप की सिद्धि तथा बुद्धि नामक दो कन्याओं के साथ गणेशजी का विवाह तथा उनसे ‘क्षेम’ तथा ‘लाभ’ नामक दो पुत्रों की उत्पत्ति, कुमार कार्तिकेय का पृथ्वी की परिक्रमाकर लौटना और क्षुब्ध होकर क्रौंचपर्वत पर चले जाना, कुमारखण्ड… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 19 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय स्वामिकार्तिकेय और गणेश की बाल-लीला, विवाह के विषय में दोनों का परस्पर विवाद, शिवजी द्वारा पृथ्वी-परिक्रमा का आदेश, कार्तिकेय का प्रस्थान, बुद्धिमान् गणेशजी का पृथ्वीरूप माता-पिता की परिक्रमा और प्रसन्न शिवा-शिव द्वारा गणेश के प्रथम विवाह की स्वीकृति नारदजी… Read More