शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय देवराज इन्द्र, विष्णु तथा वीरक आदि के साथ तारकासुर का युद्ध ब्रह्माजी बोले — हे तात ! हे नारद ! इस प्रकार मैंने देव-दानव-सेनाओं के भयंकर युद्ध का वर्णन किया, अब दोनों सेनाओं के सेनापतियों-कार्तिकेय और तारकासुर के युद्ध… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय तारकासुर से सम्बद्ध देवासुर-संग्राम ब्रह्माजी बोले — विभु कार्तिकेय के इस चरित्र को देखकर विष्णु आदि देवताओं के मन में विश्वास हो गया और वे परम प्रसन्न हो गये । शिवजी के तेज से प्रभावित होकर वे उछलते तथा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय कुमार कार्तिकेय की ऐश्वर्यमयी बाललीला ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! वहाँ पर रहकर कार्तिकेय ने अपनी भक्ति देनेवाली जो बाललीला की, उस लीला को आप प्रेमपूर्वक सुनिये । उस समय नारद नामक एक ब्राह्मण, जो यज्ञ कर रहा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय पार्वती के द्वारा प्रेषित रथ पर आरूढ़ हो कार्तिकेय का कैलासगमन, कैलास पर महान् उत्सव होना, कार्तिकेय का महाभिषेक तथा देवताओं द्वारा विविध अस्त्र-शस्त्र तथा रत्नाभूषण प्रदान करना, कार्तिकेय का ब्रह्माण्ड का अधिपतित्व प्राप्त करना ब्रह्माजी बोले — उसी… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय पार्वती के कहने पर शिव द्वारा देवताओं तथा कर्मसाक्षी धर्मादिकों से कार्तिकेय के विषय में जिज्ञासा करना और अपने गणों को कृत्तिकाओं के पास भेजना, नन्दिकेश्वर तथा कार्तिकेय का वार्तालाप, कार्तिकेय का कैलास के लिये प्रस्थान नारदजी बोले —… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय महर्षि विश्वामित्र द्वारा बालक स्कन्द का संस्कार सम्पन्न करना, बालक स्कन्द द्वारा क्रौंचपर्वत का भेदन, इन्द्र द्वारा बालक पर वज्र प्रहार, शाख-विशाख आदि का उत्पन्न होना, कार्तिकेय का षण्मुख होकर छः कृत्तिकाओं का दुग्धपान करना नारदजी बोले — हे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय भगवान् शिव के तेज से स्कन्द का प्रादुर्भाव और सर्वत्र महान् आनन्दोत्सव का होना ब्रह्माजी बोले — देवताओं एवं विष्णु की स्तुति सुनकर योगज्ञानविशारद भगवान् शंकर यद्यपि निष्काम हैं तथापि उन्होंने भोग का परित्याग नहीं किया । फिर वे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय कैलास पर भगवान् शिव एवं पार्वती का विहार वन्दे वन्दनतुष्टमानसमतिप्रेमप्रियं प्रेमदं पूर्णं पूर्णकरं प्रपूर्णनिखिलेश्वर्यैकवासं शिवम् । सत्यं सत्यमयं त्रिसत्यविभवं सत्यप्रियं सत्यदं विष्णुब्रह्मनुतं स्वकीयकृपयोपात्ताकृतिं शंकरम् ॥ वन्दना करने से जिनका मन प्रसन्न हो जाता है, जिन्हें प्रेम अत्यन्त प्रिय है,… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 55 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पचपनवाँ अध्याय शिव-पार्वती तथा बरात की विदाई, भगवान् शिव का समस्त देवताओं को विदा करके कैलास पर रहना और शिव-विवाहोपाख्यान के श्रवण की महिमा ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार ब्राह्मणी ने देवी पार्वती को पातिव्रत्यधर्म का उपदेश देकर मेना… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 54 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौवनवाँ अध्याय मेना की इच्छा के अनुसार एक ब्राह्मणपत्नी का पार्वती को पातिव्रतधर्म का उपदेश देना ब्रह्माजी बोले — उसके बाद सप्तर्षियों ने हिमालय से कहा — आज गिरिजा की विदाई के लिये उत्तम मुहूर्त है, अतः आप अपनी पुत्री पार्वती… Read More