शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 53 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 53 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तिरपनवाँ अध्याय चतुर्थीकर्म, बरात का कई दिनों तक ठहरना, सप्तर्षियों के समझाने से हिमालय का बरात को विदा करने के लिये राजी होना, मेना का शिव को अपनी कन्या सौंपना तथा बरात का पुरी के बाहर जाकर ठहरना ब्रह्माजी बोले —… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 52 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 52 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बावनवाँ अध्याय हिमालय द्वारा सभी बरातियों को भोजन कराना, शिव का विश्वकर्मा द्वारा निर्मित वासगृह में शयन करके प्रातःकाल जनवासे में आगमन ब्रह्माजी बोले — हे तात ! इसके बाद भाग्यवान् एवं बुद्धिमान् पर्वतश्रेष्ठ हिमालय ने सबको भोजन कराने के लिये… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 51 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 51 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्यावनवाँ अध्याय रति के अनुरोध पर श्रीशंकर का कामदेव को जीवित करना, देवताओं द्वारा शिवस्तुति ब्रह्माजी बोले — उस अवसर पर अनुकूल समय जानकर प्रसन्नता से पूर्ण रति दीनवत्सल शंकर से कहने लगी — ॥ १ ॥ रति बोली — [हे… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 50 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 50 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पचासवाँ अध्याय शिवा-शिव के विवाह-कृत्य-सम्पादन के अनन्तर देवियों का शिव से मधुर वार्तालाप ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! तदनन्तर मैंने शिवजी की आज्ञा से मुनियों के साथ परमप्रीति से शिवा-शिव के विवाह के शेष कृत्यों का सम्पादन किया । उन… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 49 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 49 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनचासवाँ अध्याय अग्नि परिक्रमा करते समय पार्वती के पदनख को देखकर ब्रह्मा का मोहग्रस्त होना, बालखिल्यों की उत्पत्ति, शिव का कुपित होना, देवताओं द्वारा शिवस्तुति ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इसके अनन्तर मेरी आज्ञा से ईश्वर ने ब्राह्मणों द्वारा अग्निस्थापन करके… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 48 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 48 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अड़तालीसवाँ अध्याय शिव-पार्वती के विवाह का प्रारम्भ, हिमालय द्वारा शिव के गोत्र के विषय में प्रश्न होने पर नारदजी के द्वारा उत्तर के रूपमें शिवमाहात्म्य प्रतिपादित करना, हर्षयुक्त हिमालय द्वारा कन्यादानकर विविध उपहार प्रदान करना ब्रह्माजी बोले — इसी समय वहाँ… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 47 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 47 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सैंतालीसवाँ अध्याय पाणिग्रहण के लिये हिमालय के घर शिव के गमनोत्सव का वर्णन ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर शैलराज ने प्रसन्नतापूर्वक बड़े उत्साह से वेदमन्त्रों के द्वारा शिवा एवं शिवजी का उपनयन-संस्कार सम्पन्न कराया । तदनन्तर विष्णु आदि देवताओं एवं मुनियों ने… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 46 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 46 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छियालीसवाँ अध्याय नगर में बरातियों का प्रवेश, द्वाराचार तथा पार्वती द्वारा कुलदेवता का पूजन ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर शिवजी प्रसन्नचित्त होकर अपने गणों, देवताओं, दूतों तथा अन्य सभी लोगों के साथ कुतूहलपूर्वक हिमालय के घर गये ॥ १ ॥ हिमालय की… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 45 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 45 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पैंतालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव का अपने परम सुन्दर दिव्य रूप को प्रकट करना, मेना की प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियों का शिव के रूप का दर्शन करके जन्म और जीवन को सफल मानना ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! इसी… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 44 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 44 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौवालीसवाँ अध्याय शिवजी के रूप को देखकर मेना का विलाप, पार्वती तथा नारद आदि सभी को फटकारना, शिव के साथ कन्या का विवाह न करने का हठ, विष्णु द्वारा मेना को समझाना ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] चेतना प्राप्तकर शैलप्रिया सती… Read More