शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 18 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय जलन्धर के आधिपत्य में रहनेवाले दुखी देवताओं द्वारा शंकर की स्तुति, शंकरजी का देवर्षि नारद को जलन्धर के पास भेजना, वहाँ देवों को आश्वस्त करके नारदजी का जलन्धर की सभा में जाना, उसके ऐश्वर्य को देखना तथा पार्वती के… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 17 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय विष्णु और जलन्धर के युद्ध में जलन्धर के पराक्रम से सन्तुष्ट विष्णु का देवों एवं लक्ष्मीसहित उसके नगर में निवास करना सनत्कुमार बोले — इसके बाद महापराक्रमी दैत्य शूल, परशु और पट्टिशों से भय से व्याकुल चित्तवाले देवताओं पर… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 16 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय जलन्धर से भयभीत देवताओं का विष्णु के समीप जाकर स्तुति करना, विष्णु सहित देवताओं का जलन्धर की सेना के साथ भयंकर युद्ध सनत्कुमार बोले — इन्द्रसहित सभी देवता उस दैत्य को पुनः आता हुआ देखकर भय से काँप उठे… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 15 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय राहु के शिरश्छेद तथा समुद्रमन्थन के समय के देवताओं के छल को जानकर जलन्धर द्वारा क्रुद्ध होकर स्वर्ग पर आक्रमण, इन्द्रादि देवों की पराजय, अमरावती पर जलन्धर का आधिपत्य, भयभीत देवताओं का सुमेरु की गुफा में छिपना सनत्कुमार बोले… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 14 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय क्षारसमुद्र में प्रक्षिप्त भगवान् शंकर की नेत्राग्नि से समुद्र के पुत्र के रूप में जलन्धर का प्राकट्य, कालनेमि की पुत्री वृन्दा के साथ उसका विवाह व्यासजी बोले — हे सनत्कुमार ! हे सर्वज्ञ ! हे ब्रह्मपुत्र ! आपको नमस्कार… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 13 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय बृहस्पति तथा इन्द्र का शिवदर्शन के लिये कैलास की ओर प्रस्थान, सर्वज्ञ शिव का उनकी परीक्षा लेने के लिये दिगम्बर जटाधारी रूप धारणकर मार्ग रोकना, क्रुद्ध इन्द्र द्वारा उनपर वज्र प्रहार की चेष्टा, शंकर द्वारा उनकी भुजा को स्तम्भित… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 12 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय त्रिपुरदाह के अनन्तर शिवभक्त मयदानव का भगवान् शिव की शरण में आना, शिवद्वारा उसे अपनी भक्ति प्रदानकर वितललोक में निवास करने की आज्ञा देना, देवकार्य सम्पन्नकर शिवजी का अपने लोक में जाना सनत्कुमार बोले — शिवजी को प्रसन्न देखकर… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 11 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय त्रिपुरदाह के अनन्तर भगवान् शिव के रौद्ररूप से भयभीत देवताओं द्वारा उनकी स्तुति और उनसे भक्ति का वरदान प्राप्त करना व्यासजी बोले — हे ब्रह्मपुत्र ! हे महाप्राज्ञ ! आप धन्य हैं । हे शैवश्रेष्ठ ! त्रिपुर के जल… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 10 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय भगवान् शिव का त्रिपुर पर सन्धान करना, गणेशजी का विघ्न उपस्थित करना, आकाशवाणी द्वारा बोधित होने पर शिव द्वारा विघ्ननाशक गणेश का पूजन, अभिजित् मुहूर्त में तीनों पुरों का एकत्र होना और शिव द्वारा बाणाग्नि से सम्पूर्ण त्रिपुर को… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 09 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 09 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः नौवाँ अध्याय ब्रह्माजी को सारथी बनाकर भगवान् शंकर का दिव्य रथ में आरूढ़ होकर अपने गणों तथा देवसेना के साथ त्रिपुर-वध के लिये प्रस्थान, शिव का पशुपति नाम पड़ने का कारण सनत्कुमार बोले — इस प्रकार के महादिव्य तथा अनेक आश्चर्यों… Read More