शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 28 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठाईसवाँ अध्याय शंखचूड की पुष्कर-क्षेत्र में तपस्या, ब्रह्मा द्वारा उसे वर की प्राप्ति, ब्रह्मा की प्रेरणा से शंखचूड का तुलसी से विवाह सनत्कुमार बोले — इसके बाद उस शंखचूड ने जैगीषव्य महर्षि के उपदेश से ब्रह्माजी के पुष्कर-क्षेत्र में प्रीतिपूर्वक बहुत… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय शंखचूड की उत्पत्ति की कथा सनत्कुमार बोले — हे मुने ! अब आप शंकरजी का एक और चरित प्रेमपूर्वक सुनिये, जिसके सुननेमात्र से शंकरजी के प्रति दृढ़ भक्ति उत्पन्न हो जाती है ॥ १ ॥ एक शंखचूड नामक दानव… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय विष्णुजी के मोहभंग के लिये शंकरजी की प्रेरणा से देवों द्वारा मूलप्रकृति की स्तुति, मूलप्रकृति द्वारा आकाशवाणी के रूप में देवों को आश्वासन, देवताओं द्वारा त्रिगुणात्मिका देवियों का स्तवन, विष्णु का मोहनाश, धात्री (आँवला), मालती तथा तुलसी की उत्पत्ति… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय जलन्धरवध से प्रसन्न देवताओं द्वारा भगवान् शिव की स्तुति सनत्कुमार बोले — [हे व्यास!] इसके बाद ब्रह्मा आदि सभी देवता एवं मुनिगण सिर झुकाकर प्रिय वाणी से देवदेवेश की स्तुति करने लगे — ॥ १ ॥ ॥ देवा ऊचुः… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय दैत्यराज जलन्धर तथा भगवान् शिव का घोर संग्राम, भगवान् शिव द्वारा चक्र से जलन्धर का शिरश्छेदन, जलन्धर का तेज शिव में प्रविष्ट होना, जलन्धर-वध से जगत् में सर्वत्र शान्ति का विस्तार व्यासजी बोले — ब्रह्माजी के श्रेष्ठ पुत्र परम… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय विष्णु द्वारा माया उत्पन्नकर वृन्दा को स्वप्न के माध्यम से मोहित करना और स्वयं जलन्धर का रूप धारणकर वृन्दा के पातिव्रत का हरण करना, वृन्दा द्वारा विष्णु को शाप देना तथा वृन्दा के तेज का पार्वती में विलीन होना… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय श्रीशिव और जलन्धर का युद्ध, जलन्धर द्वारा गान्धर्वी माया से शिव को मोहितकर शीघ्र ही पार्वती के पास पहुँचना, उसकी माया को जानकर पार्वती का अदृश्य हो जाना और भगवान् विष्णु को जलन्धरपत्नी वृन्दा के पास जाने के लिये… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 21 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्कीसवाँ अध्याय नन्दी, गणेश, कार्तिकेय आदि शिवगणों का कालनेमि, शुम्भ तथा निशुम्भ के साथ घोर संग्राम, वीरभद्र तथा जलन्धर का युद्ध, भयाकुल शिवगणों का शिवजी को सारा वृत्तान्त बताना सनत्कुमार बोले — तब नन्दी, गणेश, कार्तिकेय आदि गणाधिपतियों को देखकर वे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय दूत के द्वारा कैलास का वृत्तान्त जानकर जलन्धर का अपनी सेना को युद्ध का आदेश देना, भयभीत देवों का शिव की शरण में जाना, शिवगणों तथा जलन्धर की सेना का युद्ध, शिव द्वारा कृत्या को उत्पन्न करना, कृत्या द्वारा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय पार्वती को प्राप्त करने के लिये जलन्धर का शंकर के पास दूतप्रेषण, उसके वचन से उत्पन्न क्रोध से शम्भु के भ्रूमध्य से एक भयंकर पुरुष की उत्पत्ति, उससे भयभीत जलन्धर के दूत का पलायन, उस पुरुष का कीर्तिमुख नाम… Read More