शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय भगवान् शिव द्वारा सती को वर-प्राप्ति और शिव का ब्रह्माजी को दक्ष प्रजापति के पास भेजना ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार मैंने सभी देवताओं के द्वारा की गयी शिवजी की उत्तम स्तुति को आपसे कह दिया । हे मुने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव से विवाह के लिये प्रार्थना करना तथा उनकी इसके लिये स्वीकति ब्रह्माजी बोले — भगवान् विष्णु आदि देवताओं द्वारा की गयी स्तुति को सुनकर सबकी उत्पत्ति करनेवाले भगवान् शंकर बड़े प्रसन्न हुए और जोर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय सती द्वारा नन्दा-व्रत का अनुष्ठान तथा देवताओं द्वारा शिवस्तुति ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! एक समय आपके साथ जाकर मैंने त्रिलोकी की सर्वस्वभूता उन सती को अपने पिताके पास बैठी हुई देखा ॥ १ ॥ पिता के द्वारा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय दक्ष की साठ कन्याओं का विवाह, दक्ष के यहाँ देवी शिवा (सती)-का प्राकट्य, सती की बाललीला का वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे देवमुने ! इसी समय मैं लोकपितामह ब्रह्मा भी इस चरित्र को जानकर प्रीतिपूर्वक शीघ्रता से वहाँ पहुँचा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय ब्रह्मा की आज्ञा से दक्ष द्वारा मैथुनी सृष्टि का आरम्भ, अपने पुत्र हर्यश्वों तथा सबलाश्वों को निवृत्तिमार्ग में भेजने के कारण दक्ष का नारद को शाप देना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाप्राज्ञ !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय दक्षप्रजापति का तपस्या के प्रभाव से शक्ति का दर्शन और उनसे रुद्रमोहन की प्रार्थना करना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे शिवभक्त ! हे प्राज्ञ ! हे निष्पाप ! आपने शिवा तथा शिव के कल्याणकारी चरित्र का भली-भाँति… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय ब्रह्मा द्वारा जगदम्बिका शिवा की स्तुति तथा वर की प्राप्ति नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे महाप्राज्ञ ! हे तात ! [आपसे] इस प्रकार कहकर विष्णु के अन्तर्धान हो जाने पर क्या हुआ ? हे विधे ! आपने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु के संवाद में शिवमाहात्म्य का वर्णन नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! आप धन्य हैं, जो आपकी बुद्धि शिव में आसक्त है । आपने परमात्मा शंकरजी के सुन्दर चरि त्रका… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 09 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः नौवाँ अध्याय कामदेव द्वारा भगवान् शिव को विचलित न कर पाना, ब्रह्माजी द्वारा कामदेव के सहायक मारगणों की उत्पत्ति; ब्रह्माजी का उन सबको शिव के पास भेजना, उनका वहाँ विफल होना, गणोंसहित कामदेव का वापस अपने आश्रम को लौटना ब्रह्माजी बोले… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय कामदेव के सहचर वसन्त के आविर्भाव का वर्णन सूतजी बोले — प्रजापति ब्रह्माजी का यह वचन सुनकर प्रसन्नचित्त हो नारदजी उनसे कहने लगे —- ॥ १ ॥ नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग !… Read More