शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 37 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सैंतीसवाँ अध्याय गणों सहित वीरभद्र द्वारा दक्षयज्ञ का विध्वंस, दक्षवध, वीरभद्र का वापस कैलास पर्वत पर जाना, प्रसन्न भगवान् शिव द्वारा उसे गणाध्यक्ष पद प्रदान करना ब्रह्माजी बोले — सभी शत्रुओं के विनाशक, महाबलवान् वीरभद्र भगवान् विष्णु के साथ युद्ध में… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 36 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छत्तीसवाँ अध्याय युद्ध में शिवगणों से पराजित हो देवताओं का पलायन, इन्द्र आदि के पूछने पर बृहस्पति का रुद्रदेव की अजेयता बताना, वीरभद्र का देवताओं को युद्ध के लिये ललकारना, श्रीविष्णु और वीरभद्र की बातचीत ब्रह्माजी बोले — उस समय [शिवतत्त्वरूपी]… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 35 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पैंतीसवाँ अध्याय दक्ष द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिये भगवान् विष्णु से प्रार्थना, भगवान् का शिवद्रोहजनित संकट को टालने में अपनी असमर्थता बताते हुए दक्ष को समझाना तथा सेनासहित वीरभद्र का आगमन दक्ष बोले — हे देवदेव ! हे हरे !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 34 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौंतीसवाँ अध्याय दक्ष तथा देवताओं का अनेक अपशकुनों एवं उत्पातसूचक लक्षणों को देखकर भयभीत होना ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार गणोंसहित वीरभद्र के प्रस्थान करने पर दक्ष तथा देवताओं को अनेक प्रकार के अशुभ लक्षण दिखायी पड़ने लगे ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 33 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तैंतीसवाँ अध्याय गणोंसहित वीरभद्र और महाकाली का दक्षयज्ञ-विध्वंस के लिये प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] महेश्वर के कहे गये इस वचन को आदरपूर्वक सुनकर वीरभद्र बहुत सन्तुष्ट हुए । उन्होंने महेश्वर को प्रणाम किया ॥ १ ॥ तत्पश्चात् त्रिशूलधारी उन… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 32 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बत्तीसवाँ अध्याय सती के दग्ध होने का समाचार सुनकर कुपित हुए शिव का अपनी जटा से वीरभद्र और महाकाली को प्रकट करके उन्हें यज्ञ-विध्वंस करने की आज्ञा देना नारदजी बोले — [हे ब्रह्मन् !] आकाशवाणी को सुनकर अज्ञानी दक्ष ने क्या… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 31 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इकतीसवाँ अध्याय यज्ञमण्डप में आकाशवाणी द्वारा दक्ष को फटकारना तथा देवताओं को सावधान करना ब्रह्माजी बोले — हे मुनीश्वर ! इसी बीच वहाँ दक्ष तथा देवता आदिको सुनाते हुए आकाशवाणी ने यथार्थ बात कही ॥ १ ॥ आकाशवाणी बोली — हे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 30 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसवाँ अध्याय दक्षयज्ञ में सती का योगाग्नि से अपने शरीर को भस्म कर देना, भृगु द्वारा यज्ञकुण्ड से ऋभुओं को प्रकट करना, ऋभुओं और शंकर के गणों का युद्ध, भयभीत गणों का पलायित होना नारदजी बोले — हे विधे ! जब… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 29 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनतीसवाँ अध्याय यज्ञशाला में शिव का भाग न देखकर तथा दक्ष द्वारा शिव-निन्दा सुनकर क्रुद्ध हो सती का दक्ष तथा देवताओं को फटकारना और प्राणत्याग का निश्चय ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] दक्षकन्या सती उस स्थान पर गयीं, जहाँ देवता, असुर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 28 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठाईसवाँ अध्याय दक्षयज्ञ का समाचार पाकर एवं शिव की आज्ञा प्राप्तकर देवी सती का शिवगणों के साथ पिता के यज्ञमण्डप के लिये प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! जब देवता तथा ऋषिगण बड़े उत्साह के साथ दक्ष के यज्ञ में… Read More