शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 27 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय दक्षप्रजापति द्वारा महान् यज्ञ का प्रारम्भ, यज्ञ में दक्ष द्वारा शिव के न बुलाये जाने पर दधीचि द्वारा दक्ष की भर्त्सना करना, दक्ष के द्वारा शिव-निन्दा करने पर दधीचि का वहाँ से प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — हे मुने !… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 26 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय सती के उपाख्यान में शिव के साथ दक्ष का विरोध वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! पूर्वकाल में प्रयाग में एकत्रित हुए समस्त मुनियों तथा महात्माओं का विधि-विधान से एक बहुत बड़ा यज्ञ हुआ ॥ १ ॥ उस… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 25 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय श्रीशिव के द्वारा गोलोकधाम में श्रीविष्णु का गोपेश के पद पर अभिषेक, श्रीराम द्वारा सती के मन का सन्देह दूर करना, शिव द्वारा सती का मानसिक रूप से परित्याग राम बोले — देवि ! प्राचीन काल में एक समय… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 24 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय दण्डकारण्य में शिव को राम के प्रति मस्तक झुकाते देख सती का मोह तथा शिव की आज्ञा से उनके द्वारा राम की परीक्षा नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे प्रजानाथ ! हे महाप्राज्ञ ! हे… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 23 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय सती के पूछने पर शिव द्वारा भक्ति की महिमा तथा नवधा भक्ति का निरूपण ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! इस प्रकार शंकरजी के साथ विहार करके वे सती काम से सन्तुष्ट हो गयीं और उनके मन में वैराग्य… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 22 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय सती और शिव का विहार-वर्णन ब्रह्माजी बोले — किसी समय वर्षाऋतु में जब श्रीमहादेवजी कैलासपर्वत के शिखर पर विराजमान थे, उस समय सती शिवजी से कहने लगीं — ॥ १ ॥ सती बोलीं — हे देवदेव ! हे महादेव… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 21 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 21 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्कीसवाँ अध्याय कैलास पर्वत पर भगवान् शिव एवं सती की मधुर लीलाएँ नारदजी बोले — हे तात ! हे अनघ ! आप सर्वज्ञ की बात ठीक है । आपके द्वारा मैंने शिवा-शिव के अत्यन्त अद्भुत एवं कल्याणकारी चरित्र को सुना ॥… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का ‘रुद्रशिर’ नाम पड़ने का कारण, सती एवं शिव का विवाहोत्सव, विवाह के अनन्तर शिव और सती का वृषभारूढ़ हो कैलास के लिये प्रस्थान नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! हे शिवभक्त… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय शिव का सती के साथ विवाह, विवाह के समय शम्भु की माया से ब्रह्मा का मोहित होना और विष्णु द्वारा शिवतत्त्व का निरूपण ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार कन्यादानकर दक्ष ने भगवान् शंकर को अनेक प्रकार के… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 18 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय देवताओं और मुनियोंसहित भगवान् शिव का दक्ष के घर जाना, दक्ष द्वारा सबका सत्कार एवं सती तथा शिव का विवाह नारदजी बोले — जब आप भगवान् रुद्र के पास गये, तब क्या चरित्र हुआ, हे तात ! कौन-सी बात… Read More