शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय भगवान् विष्णु की नाभि से कमल का प्रादुर्भाव, शिवेच्छा से ब्रह्माजी का उससे प्रकट होना, कमलनाल के उद्गम का पता लगाने में असमर्थ ब्रह्मा का तप करना, श्रीहरि का उन्हें दर्शन देना, विवादग्रस्त ब्रह्मा-विष्णु के बीच में अग्निस्तम्भ का… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय महाप्रलयकाल में केवल सब्रह्म की सत्ता का प्रतिपादन, उस निर्गुण-निराकार ब्रह्म से ईश्वरमूर्ति ( सदाशिव)-का प्राकट्य, सदाशिव द्वारा स्वरूपभूत शक्ति ( अम्बिका)-का प्रकटीकरण, उन दोनों के द्वारा उत्तम क्षेत्र ( काशी या आनन्दवन)-का प्रादुर्भाव, शिव के वामांग से परम… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय नारदजी का शिवतीर्थों में भ्रमण, शिवगणों को शापोद्धार की बात बताना तथा ब्रह्मलोक में जाकर ब्रह्माजी से शिवतत्त्व के विषय में प्रश्न करना सूतजी बोले — महर्षियो ! भगवान् श्रीहरि के अन्तर्धान हो जाने पर मुनिश्रेष्ठ नारद शिवलिंगों का… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय नारदजी का भगवान् विष्णु को क्रोधपूर्वक फटकारना और शाप देना, फिर माया के दूर हो जाने पर पश्चात्तापपूर्वक भगवान् के चरणों में गिरना और शुद्धि का उपाय पूछना तथा भगवान् विष्णु का उन्हें समझा-बुझाकर शिव का माहात्म्य जानने के… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय मायानिर्मित नगर में शीलनिधि की कन्या पर मोहित हुए नारदजी का भगवान् विष्णु से उनका रूप माँगना, भगवान् का अपने रूप के साथ वानरका-सा मुँह देना, कन्या का भगवान् को वरण करना और कुपित हुए नारद का शिवगणों… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय नारद मुनि की तपस्या, इन्द्र द्वारा तपस्या में विघ्न उपस्थित करना, नारद का काम पर विजय पाना और अहंकार से युक्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र से अपने तप का कथन सूतजी बोले — [हे मुनियो!] एक समय की… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय ऋषियों के प्रश्न के उत्तर में श्रीसूतजी द्वारा नारद-ब्रह्म-संवाद की अवतारणा विश्वोद्भवस्थितिलयादिषु हेतुमेकं गौरीपतिं विदिततत्त्वमनन्तकीर्तिम् । मायाश्रयं विगतमायमचिन्त्यरूपं बोधस्वरूपममलं हि शिवं नमामि ॥ जो विश्व की उत्पत्ति-स्थिति और लय आदि के एकमात्र कारण हैं, गिरिराजकुमारी उमा के पति… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय रुद्राक्षधारण की महिमा तथा उसके विविध भेदों का वर्णन सूतजी बोले — हे महाप्राज्ञ ! हे महामते ! शिवरूप हे शौनक ऋषे ! अब मैं संक्षेप से रुद्राक्ष का माहात्म्य बता रहा हूँ, सुनिये ॥ १ ॥ रुद्राक्ष शिव को… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय भस्म-माहात्म्य का निरूपण सूतजी बोले — हे महर्षियो ! भस्म सम्पूर्ण मंगलों को देनेवाला तथा उत्तम है, उसके दो भेद बताये गये हैं । मैं उन भेदों का वर्णन करता हूँ, आप लोग सावधान होकर सुनिये ॥ १ ॥ एकको… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय भस्म, रुद्राक्ष और शिवनाम के माहात्म्य का वर्णन ऋषिगण बोले — हे महाभाग व्यासशिष्य सूतजी ! आपको नमस्कार है । अब आप परम उत्तम भस्म-माहात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ भस्म-माहात्म्य, रुद्राक्ष-माहात्म्य तथा उत्तम नाम-माहात्म्य — इन तीनों… Read More