श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थ-आश्रमों के नियम नारदजी कहते हैं — धर्मराज ! गुरुकुल में निवास करनेवाला ब्रह्मचारी अपनी इन्द्रियों को वश में रखकर दास के समान अपने को छोटा माने, गुरुदेव के चरणों में सुदृढ़ अनुराग रक्खे… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्म का निरूपण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — भगवन्मय प्रह्लादजी के साधुसमाज में सम्मानित पवित्र चरित्र सुनकर संतशिरोमणि युधिष्ठिर को बड़ा आनन्द हुआ । उन्होंने नारदजी से और भी पूछा ॥ १ ॥ युधिष्ठिरजी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय प्रह्लादजी के राज्याभिषेक और त्रिपुरदहन की कथा नारदजी कहते हैं — प्रह्लादजी ने बालक होने पर भी यही समझा कि वरदान माँगना प्रेम-भक्ति का विघ्न हैं; इसलिये कुछ मुसकराते हुए वे भगवान् से बोले ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय प्रह्लादजी के द्वारा नृसिंह भगवान् की स्तुति नारदजी कहते हैं — इस प्रकार ब्रह्मा, शंकर आदि सभी देवगण नृसिंह भगवान् के क्रोधावेश को शान्त न कर सके और न उनके पास जा सके । किसी को… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय नृसिंहभगवान् का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपु का वध एवं ब्रह्मादि देवताओं द्वारा भगवान् की स्तुति नारदजी कहते हैं — प्रह्लादजी का प्रवचन सुनकर दैत्यबालकों ने उसी समय से निर्दोष होने के कारण, उनकी बात पकड़ ली । गुरुजी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय प्रह्लादजी द्वारा माता के गर्भ में प्राप्त हुए नारदजी के उपदेश का वर्णन नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! जब दैत्यबालकों ने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान् के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजी को मेरी बात… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय प्रह्लादजी का असुर-बालकों को उपदेश प्रह्लादजी ने कहा — मित्रो ! इस संसार में मनुष्य-जन्म बड़ा दुर्लभ हैं । इसके द्वारा अविनाशी परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है । परन्तु पता नहीं कब इसका अन्त हो… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय हिरण्यकशिपु के द्वारा प्रह्लादजी के वध का प्रयत्न नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! दैत्यों ने भगवान् श्रीशुक्राचार्यजी को अपना पुरोहित बनाया था । उनके दो पुत्र थे — शण्ड और अमर्क । वे दोनों राजमहल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय हिरण्यकशिपु के अत्याचार और प्रह्लाद के गुणों का वर्णन नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! जब हिरण्यकशिपु ने ब्रह्माजी से इस प्रकार के अत्यन्त दुर्लभ वर माँगे, तब उन्होंने उसकी तपस्या से प्रसन्न होने के कारण… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय हिरण्यकशिपु की तपस्या और वरप्राप्ति नारदजी ने कहा — युधिष्ठिर ! अब हिरण्यकशिपु ने यह विचार किया कि ‘मैं अजेय, अजर, अमर और संसार का एकछत्र सम्राट् बन जाऊँ, जिससे कोई मेरे सामने खड़ा तक न… Read More