श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-39 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-39 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकोनचत्वारिंशोऽध्यायः उनतालीसवाँ अध्याय देवी-पूजन के विविध प्रकारों का वर्णन देवीगीतायां श्रीदेव्याः पूजाविधिवर्णनम् हिमालय बोले — हे देवेश्वरि ! हे महेश्वरि ! हे करुणासागरे ! हे अम्बिके ! अब आप यथार्थरूप से अपने पूजन की विधि को भलीभाँति बतलाइये ॥ १… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-38 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-38 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-अष्टत्रिंशोऽध्यायः अड़तीसवाँ अध्याय भगवती के द्वारा देवीतीर्थों, व्रतों तथा उत्सवों का वर्णन देवीगीतायां महोत्सवव्रतस्थानवर्णनम् हिमालय बोले — हे देवेश्वरि ! इस पृथ्वीतल पर कौन-कौनसे पवित्र, मुख्य, दर्शनीय तथा आप भगवती के लिये अत्यन्त प्रिय स्थान हैं ? हे माता! आपको… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-37 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-37 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-सप्तत्रिंशोऽध्यायः सैंत्तीसवाँ अध्याय भगवती द्वारा अपनी श्रेष्ठ भक्ति का वर्णन देवीगीतायां भक्तिमहिमावर्णनम् हिमालय बोले — हे अम्ब! आप मुझे अपनी वह भक्ति बताने की कृपा कीजिये, जिस भक्ति के द्वारा अपरिपक्व वैराग्यवाले मध्यम अधिकारी को भी सुगमतापूर्वक ज्ञान हो जाय… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-36 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-36 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-षट्त्रिंशोऽध्यायः छत्तीसवाँ अध्याय भगवती के द्वारा हिमालय को ज्ञानोपदेश – ब्रह्मस्वरूप का वर्णन देवीगीतायां ब्रह्मविद्योपदेशवर्णनम् देवी बोलीं — हे राजन् ! इस प्रकार आसन पर सम्यक् विराजमान होकर योग से युक्त चित्तवाले साधक को निष्कपट भक्ति के साथ मुझ ब्रह्मस्वरूपिणी… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-35 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-35 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चत्रिंशोऽध्यायः पैंतीसवाँ अध्याय भगवती द्वारा यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा तथा कुण्डली जागरण की विधि बताना देवीगीतायां मन्त्रसिद्धिसाधनवर्णनम् हिमालय बोले —– हे महेश्वरि ! अब आप ज्ञान प्रदान करने वाले योग का सांगोपांग वर्णन कीजिये, जिसकी साधना से मैं… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-34 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-34 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुस्त्रिंशोऽध्यायः चौंतीसवाँ अध्याय भगवती का हिमालय तथा देवताओं से परमपद की प्राप्ति का उपाय बताना देवीगीतायां ज्ञानस्य मोक्षहेतुत्ववर्णनम् देवी बोलीं — कहाँ तुम सब मन्दभाग्य देवता और कहाँ मेरा यह अद्भुत रूप, तथापि भक्तवत्सलता के कारण मैंने आप लोगों को… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-33 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-33 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः तैंतीसवाँ अध्याय भगवती का अपनी सर्वव्यापकता बताते हुए विराट्रूप प्रकट करना, भयभीत देवताओं की स्तुति से प्रसन्न भगवती का पुनः सौम्यरूप धारण करना श्रीदेवीविराड्रूपदर्शनसहितं देवकृततत्स्तववर्णनम् देवी बोलीं — [ हे हिमालय ! ] यह सम्पूर्ण चराचर जगत् मेरी मायाशक्ति… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-32 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-32 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वात्रिंशोऽध्यायः बतीसवाँ अध्याय देवीगीता के प्रसंग में भगवती का हिमालय से माया तथा अपने स्वरूप का वर्णन देव्या व्यष्टिसमष्टिरूपवर्णनम् देवी बोलीं — सभी देवता मेरे द्वारा कहे जाने वाले वचन को सुनें, जिसके श्रवणमात्र से मनुष्य मेरे स्वरूप को प्राप्त… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-31 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय तारकासुर से पीड़ित देवताओं द्वारा भगवती की स्तुति तथा भगवती का हिमालय की पुत्री के रूप में प्रकट होने का आश्वासन देना हिमालयगृहे पार्वतीजन्मविषये देवान् प्रति देवीकथनवर्णनम् जनमेजय बोले — [ हे मुने!] हिमालय के शिखर पर… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय शक्तिपीठों की उत्पत्ति की कथा तथा उनके नाम एवं उनका माहात्म्य देवीपीठवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तत्पश्चात् वे वन-प्रदेश में हिमालय की तलहटी में स्थित रहकर समाहितचित्त हो मायाबीज (भुवनेश्वरीमन्त्र ) – के जप में… Read More